- लालू यादव ने लैंड फॉर जॉब मामले में आरोप स्वीकार करने से साफ इनकार किया है और मुकदमे का सामना किया है
- जनवरी में कोर्ट ने कहा कि रेलवे नौकरियों का उपयोग जमीन सौदेबाजी के लिए किया गया, जो एक आपराधिक साजिश है
- जज ने सार्वजनिक रोजगार का व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने के पर्याप्त प्रारंभिक सबूत पाए हैं
लैंड फॉर जॉब से जुड़े सीबीआई मामले में लालू यादव ने आरोप स्वीकार करने से इनकार किया है. हालांकि लालू यादव ने मुकदमे का सामना करने की बात लालू प्रसाद यादव ने कही है.
बता दें कि इस साल जनवरी में कोर्ट ने इस केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि आरोपियों के खिलाफ कथित तौर पर एक 'ओवरआर्चिंग क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी' का मामला बनता है, जिसमें रेलवे की नौकरियों का इस्तेमाल जमीन हासिल करने के लिए सौदेबाज़ी के रूप में किया गया. जज ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक रोजगार को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने के पर्याप्त सबूत प्रारंभिक रूप से मौजूद हैं.
क्या है मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे. सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में ग्रुप‑D नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों के परिवारों ने जमीन के छोटे‑छोटे प्लॉट लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर किए. यह ट्रांसफर बिहार के कई जिलों में हुआ और बाद में इन जमीनों को परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज किया गया.














