- कोटपुतली स्थित छांपाला वाला भैरूजी मंदिर में 17वें वार्षिकोत्सव का आयोजन 30 जनवरी को होगा.
- इस बार 651 क्विंटल महा-चूरमा तैयार किया गया है, जो पिछले वर्ष के 551 क्विंटल से अधिक है.
- चूरमा बनाने में 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल खांड का उपयोग हुआ है.
आस्था जब आकार लेती है, तो वह अकल्पनीय हो जाती है. राजस्थान के कोटपुतली स्थित छांपाला वाला भैंरूजी मंदिर के 17वें वार्षिकोत्सव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने आधुनिक मशीनों को भी 'भक्ति की सेवा' में लगा दिया है. इस बार चर्चा मंदिर की सजावट की नहीं, बल्कि उस 651 क्विंटल 'महा-चूरमे' की है, जिसे तैयार करने का वीडियो इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है. कल्पना कीजिए—जहां कड़छियां छोटी पड़ गईं, वहां JCB के पंजे घी और शक्कर मिला रहे हैं, जहां परात कम पड़ी वहां ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं और थ्रेसर मशीनों से प्रसाद का मिश्रण तैयार किया जा रहा है.
17वें वार्षिकोत्सव की तैयारियां पूरी, क्षेत्र में उत्साह का माहौल
कल्याणपुरा कुहाड़ा गांव की अरावली पहाड़ियों में स्थित भैरूजी मंदिर में शुक्रवार, 30 जनवरी को वार्षिकोत्सव का आयोजन होगा. इस अवसर पर विशाल मेला, महाभंडारा, रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा. ग्रामीण पिछले एक महीने से तैयारियों में जुटे हैं और पूरे आयोजन का मैनेजमेंट स्वयं संभाल रहे हैं.
कैसे बनाया जाता है महाप्रसाद
इस बार 651 क्विंटल चूरमा—प्रदेश का अनोखा रिकॉर्ड पिछले वर्ष तैयार किए गए 551 क्विंटल चूरमे से इस बार महाप्रसादी को और बड़ा रूप दिया गया है. चूरमा बनाने में विशाल स्तर पर सामग्री का उपयोग हो रहा है. 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल खांड, मावा, ड्राय फ्रूट्स, दूध, दही, दाल एवं मसाले प्रसाद वितरण के लिए 2.5 लाख पत्तल-दोने और 4 लाख कप मंगवाए गए हैं. पेयजल के लिए 25 टैंकर तैनात रहेंगे.
JCB से घी मिलाने का दृश्य वायरल—देसी तरीके की चर्चा देशभर में महाप्रसादी के चूरमे को परंपरागत ग्रामीण तरीके से विशेष तकनीक के ज़रिए तैयार किया जा रहा है. घी और मिश्रण को एकसाथ मिलाने के लिए JCB मशीन, थ्रेसर, ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जा रहा है. यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे लोग "राजस्थानी देसी तरीका" बताते हुए खूब शेयर कर रहे हैं.
25 हजार कलशों के साथ 3 किमी लंबी भव्य कलश यात्रा
कार्यक्रम से एक दिन पहले गुरुवार को चोटिया मोड़ से मंदिर तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा निकाली जाएगी. इसमें हजारों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश लेकर गाजे-बाजे के साथ शामिल होंगी. ग्रामीण विभिन्न स्थानों पर स्वागत-सत्कार की तैयारियां कर चुके हैं.
हेलीपैड से होगी पुष्प वर्षा
मंदिर परिसर में बने स्थायी हेलीपैड से वार्षिकोत्सव पर भैरव बाबा के दर्शनार्थियों पर हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा भी की जाएगी. भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतज़ाम किए हैं. 8,500 से अधिक वालंटियर्स स्कूल के बच्चे भी सेवा में सेवा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 21 स्कूलों के 5,000 विद्यार्थी, 3,000 पुरुष स्वयंसेवक, 500 महिला स्वयंसेवक तैनात किए जाएंगे. पार्किंग, दर्शन व्यवस्था, हेलीपैड मैनेजमेंट और भीड़ नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी ग्रामीणों ने स्वयं संभाली है.
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