इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है. यह पूरा मामला घर में जले हुए नोट मिलने की घटना से जुड़ा है.
justice yashwant varma investigation committee
जांच कमेटी में कौन शामिल
लोकसभा अध्यक्ष की गठित इस नई कमेटी में न्याय जगत के बड़े नामों को शामिल किया गया है, जिससे जांच की निष्पक्षता बनी रहे.
- जस्टिस अरविंद कुमार: सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश.
- न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर: बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश.
- बी वी आचार्य: कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगी और आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश बरामद होने का दावा किया गया. इसके बाद यह मुद्दा संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. अब यह तीन सदस्यीय समिति इन शिकायतों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. समिति के पुनर्गठन से यह साफ है कि प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कैश कांड से सुर्खियों में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया था. इस याचिका में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के उन्हें पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी.
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