आ गया अपडेट! विजय थलपती की फिल्म 'जन नायकन' क्यों नहीं हुई रिलीज, जानिए अबतक क्या-क्या हुआ

Jana Nayagan : फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद समिति ने कुछ मामूली बदलावों की सिफारिश की. ये बदलाव यौन हिंसा, हिंसा और कुछ संवादों से जुड़े थे. अनुशंसित बदलाव करने के बाद फिल्म निर्माता ने फिल्म को दोबारा CBFC के पास जमा किया. फिलहाल, सब कुछ ठीक बताया जा रहा है और फिल्म रिलीज के लिए तैयार है.

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  • विजय तलपती की फिल्म जन नायकन की रिलीज 9 जनवरी 2026 को होने वाली थी लेकिन अब रिलीज कैंसिल कर दी गई है.
  • CBFC के चेन्नई कार्यालय में जांच के बाद मामूली बदलावों के साथ यूए सर्टिफिकेट के लिए प्रस्तुत की गई थी.
  • समिति ने यौन हिंसा और संवादों से संबंधित मामूली बदलावों की सिफारिश की थी, जिन्हें निर्माता ने स्वीकार किया.
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साउथ के सुपरस्टार विजय तलपती के करियर की आखिरी फिल्म 'जन नायकन' की चर्चा बीते काफी समय से हो रही है. फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने को तैयार थी, जिसका हाल ही में मचअवेटेड ट्रेलर भी रिलीज किया गया था. लेकिन अब फिल्म की रिलीज कैंसिल हो गई है. मेकर्स ने नई रिलीज डेट का ऐलान नहीं किया है.

सूत्रों के मुताबिक फिल्म निर्माता ने फिल्म से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चेन्नई कार्यालय में जमा किए. जांच के बाद, चेन्नई CBFC अधिकारी की अध्यक्षता में गठित परीक्षण समिति (एग्ज़ामिनिंग कमेटी) ने चार अन्य सदस्यों के साथ फिल्म देखी. स्क्रीनिंग समिति में एक अध्यक्ष और सरकार द्वारा नियुक्त चार सदस्य शामिल थे, जिनमें से दो महिलाएं थीं.

फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद समिति ने कुछ मामूली बदलावों की सिफारिश की. ये बदलाव यौन हिंसा, हिंसा और कुछ संवादों से जुड़े थे. अनुशंसित बदलाव करने के बाद फिल्म निर्माता ने फिल्म को दोबारा CBFC के पास जमा किया. फिलहाल, सब कुछ ठीक बताया जा रहा है और फिल्म रिलीज के लिए तैयार है.

हालांकि, स्क्रीनिंग समिति के एक सदस्य ने CBFC के चेयरमैन प्रसून जोशी को पत्र लिखकर कहा कि यह फिल्म भावनाओं को आहत करती है, इसलिए इसकी रिलीज रोकी जानी चाहिए. इस पत्र के बाद CBFC चेयरमैन ने मामले को पुनरीक्षण समिति (रिवाइज़िंग कमेटी) के पास भेज दिया. रिवाइजिंग कमेटी की बैठक शुरू होने से पहले ही फिल्म निर्माता ने अदालत का रुख किया. मामले में कोर्ट का आदेश आज आने की उम्मीद है.

‘जना नायकन' का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस ने बनाया है. फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी अहम भूमिकाओं में हैं. बताया जा रहा है कि यह फिल्म करीब 500 करोड़ रुपए में बनी है और इसे 22 देशों में चार भाषाओं में 5,000 से ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी है.

इस फिल्म को लेकर खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसे राजनीति में पूरी तरह उतरने से पहले विजय की आखिरी बड़ी फिल्म माना जा रहा है. कोर्ट में फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सतीश परासरन और वकील विजयन सुब्रमणियन ने बताया कि सेंसर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन 18 दिसंबर को किया गया था.

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फिल्म देखने के बाद 22 दिसंबर को क्षेत्रीय सेंसर बोर्ड ने कुछ सीन हटाने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के निर्देश दिए और यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की. निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड के सभी निर्देशों को मानते हुए जरूरी बदलाव कर दिए, लेकिन जब सर्टिफिकेट मिलने की बारी आई तो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की चेयरपर्सन ने ईमेल भेजकर बताया कि फिल्म के कुछ सीन और डायलॉग को लेकर शिकायत मिली है, इसलिए फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया है.

निर्माताओं ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और न ही कहीं सार्वजनिक रूप से दिखाई गई है, ऐसे में किसी तीसरे पक्ष की शिकायत का कोई आधार ही नहीं बनता. उन्होंने यह भी कहा कि जब सेंसर बोर्ड पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट की सिफारिश कर चुका था तो चेयरपर्सन को अकेले यह फैसला लेने का अधिकार नहीं है.

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निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि रिलीज से ठीक पहले सर्टिफिकेट रोकना मनमाना और गलत है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा और जिसकी भरपाई संभव नहीं है. उन्होंने कोर्ट से तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देने की मांग की.

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कानून के सामने सभी फिल्में समान हैं, चाहे उनका बजट बड़ा हो या स्टार पावर ज्यादा. उन्होंने बताया कि फिल्म के कुछ सीन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं, इसको लेकर शिकायतें मिली हैं. साथ ही फिल्म में सुरक्षा बलों के चिन्ह (इंसिग्निया) दिखाए गए हैं, जिसके लिए जरूरी अनुमति हो सकती है.

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उन्होंने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कानून के तहत ही कार्रवाई की है और उन्हें अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सवाल किया कि जब फिल्म को पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश हो चुकी थी, तो अचानक उसे रिव्यू के लिए क्यों भेजा गया, कौन-कौन से सीन हटाए गए, और जब फिल्म रिलीज ही नहीं हुई थी, तो शिकायत कैसे आ गई.

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और कहा है कि ‘जना नायकन' को सेंसर सर्टिफिकेट देने से जुड़ा फैसला 9 जनवरी को सुनाया जाएगा, उसी दिन जिस दिन फिल्म रिलीज होने वाली है.

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