- पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का प्रसिद्ध रत्नभंडार 46 साल बाद 25 मार्च से खुलकर रत्नों की गिनती शुरू करेगा.
- मंदिर परिसर में किए गए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार सर्वे में प्राचीन बस्तियों और संरचनाओं के संकेत मिले हैं.
- एमार मठ की खुदाई में मिली पुरातात्विक वस्तुएं गंगा राजवंश से संबंधित हो सकती हैं, जिससे जांच की मांग बढ़ी है.
Jagannath Temple Ratna Bhandar: पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का प्रसिद्ध रत्नभंडार खुलने जा रहा है. 46 साल बाद रत्नभंडार के दरवाजे 25 मार्च से खुलेंगे और इसमें मौजूद रत्न‑आभूषणों की गिनती शुरू होगी. लंबे समय से तैयारियों और प्रक्रियाओं के बाद अब यह ऐतिहासिक कार्य एसओपी (मानक कार्यविधि) के मुताबिक किया जाएगा. माना जाता है कि पुरी के नीचे एक प्राचीन शहर भी मौजूद है.
श्री जगन्नाथ मंदिर और रत्नभंडार को लेकर लंबे समय से कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. मंदिर परिसर के आसपास किए गए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वे ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है. सर्वे में जमीन के नीचे ऐसे ढांचों और प्राचीन बस्तियों के संकेत मिले हैं, जो इस पवित्र स्थल के इतिहास में कई अनकहे अध्याय जोड़ सकते हैं. यह पूरा मामला लोगों की जिज्ञासा, पुरातात्विक महत्व और पारदर्शिता की मांग को एक साथ उजागर करता है.
GPR सर्वे में मिली चौंकाने वाली खोजें
श्रीमंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट के काम के दौरान किए गए GPR सर्वे में ज़मीन के भीतर कई महत्वपूर्ण संरचनाओं के संकेत मिले हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ साधारण पत्थर या दीवारें नहीं, बल्कि किसी बड़े और व्यवस्थित प्राचीन बस्ती के अवशेष हो सकते हैं. इन ढांचों का फैलाव मंदिर परिसर से आसपास के कई इलाकों तक फैला हुआ दिखाई देता है.
एमार मठ से जुड़ी खोजों ने बढ़ाई जांच की मांग
इस सर्वे की जरूरत तब पड़ी जब एमार मठ की खुदाई में दो टूटी हुई शेर की मूर्तियां और कई पुरातात्विक वस्तुएं मिलीं. माना जा रहा है कि ये गंगा राजवंश के समय की चीजें हो सकती हैं. इन खोजों के बाद स्थानीय लोगों और इतिहासकारों ने विस्तृत वैज्ञानिक जांच की मांग की, जिसके बाद GPR सर्वे कराया गया.
क्या पुरी के नीचे एक प्राचीन शहर मौजूद है?
रिपोर्ट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पुरी शहर के बड़े हिस्से के नीचे एक प्राचीन बस्ती के होने के स्पष्ट संकेत हैं. यह बस्ती परिक्रमा प्रोजेक्ट क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य इलाकों तक भी फैली हो सकती है. यह संभावना और भी रोमांचक है कि कई जगहों पर प्राचीन इमारतों या संरचनाओं के अवशेष अभी भी जमीन के नीचे सुरक्षित पड़े हों.
अब तक रिपोर्ट क्यों जारी नहीं हुई?
हालांकि सर्वे के नतीजे चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है. इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पुरातात्विक संरक्षण, भविष्य की खुदाई योजनाओं और शहरी विकास में बड़ी भूमिका निभाई जा सकती है.
वरिष्ठ सेवक विनायक दास महापात्र की प्रतिक्रिया
श्री जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ सेवक विनायक दास महापात्र ने इन खोजों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एमार मठ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्य बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास कोई आधिकारिक रिपोर्ट है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ पुस्तकालय और अन्य सुविधाएँ विकसित करने की योजना बन रही है, इसलिए किसी भी प्राचीन वस्तु का संरक्षण बेहद जरूरी है.
कानून मंत्री ने कुछ बातों को किया खारिज
रत्न भंडार से जुड़े गुप्त कमरों या सुरंगों की खबरों को कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि इस तरह की किसी जानकारी के पुख्ता सबूत नहीं हैं.














