- सुप्रीम कोर्ट ने आईटी नियम 2023 के रूल 3 को रद्द करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर सुनवाई की.
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैक्ट चेक यूनिट बनाने के अधिकार देने वाले संशोधन को रद्द किया था.
- सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है.
आईटी नियम 2023 के रूल 3 को रद्द करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की चुनौती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडअप कामेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर जवाब मांगा है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और इस मामले में चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर अगली सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी.
CJI सूर्य कांत ने चिंता जताते हुए कहा कि आजकल सोशल मीडिया प्लेटफार्म खतरनाक हो गए हैं. सेना के बारे में भी गलत जानकारी के मैसेज फैलाए जा रहे हैं.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2023 के IT नियमों में संशोधन को किया रद्द
केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के तहत यह सरकार को फैक्ट चेक यूनिट (FCUs) बनाने का अधिकार देता है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2023 के आईटी नियमों में किए गए संशोधन को रद्द कर दिया था, जिसके तहत सरकार को सोशल मीडिया पर अपने कामकाज से जुड़ी “फेक या भ्रामक” जानकारी की पहचान के लिए फैक्ट चेक यूनिट (FCU) बनाने का अधिकार दिया गया था.
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन मामले की अहमियत को देखते हुए नोटिस जारी कर दिया और कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट कानून की स्पष्ट रूपरेखा तय करेगा.
कानून और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा: CJI
CJI ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है और अदालत को कानून और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा. साथ ही कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने जो चिंताएं जताई हैं, वे वाजिब हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्पष्ट दिशानिर्देश तय करने पड़ सकते हैं.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट के व्यक्तिगत जीवन और संस्थाओं की प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं और कुछ पोस्ट राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं.
फ्री स्पीच, व्यंग्य या आलोचना को दबाना उद्देश्य नहीं: मेहता
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य फ्री स्पीच, व्यंग्य या आलोचना को दबाना नहीं है. उन्होंने कहा कि FCU का मकसद केवल सरकार से जुड़ी फर्जी या भ्रामक जानकारी की पहचान करना है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि फेक न्यूज से निपटने के लिए पहले से ही आईटी एक्ट की धारा 69A और ब्लॉकिंग नियम मौजूद हैं, इसलिए FCU के लिए स्पष्ट और संतुलित नियम जरूरी हैं.














