US की होर्मुज नाकाबंदी के बीच भारत पहुंचा 40 लाख बैरल ईरानी क्रूड, 7 साल में पहली बार आई इतनी बड़ी खेप

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी सख्ती और ईरान‑अमेरिका तनाव के बीच भारत में करीब 40 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल पहुंचा है. सात वर्षों में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी खेप भारतीय बंदरगाहों पर आई है. गुजरात के सिक्का और ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर पहुंचे दो सुपरटैंकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं.

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4 Million Barrels of Iranian Crude Oil: अंतरराष्ट्रीय तनाव और अमेरिका की सख्त नीतियों के बीच भारत के लिए एक अहम ऊर्जा खबर सामने आई है. लगभग सात साल बाद इतनी बड़ी मात्रा में ईरानी कच्चा तेल दोबारा भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचा है. अमेरिका द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े कड़े कदमों और ईरान पर दबाव के बीच 40 लाख बैरल ईरानी क्रूड का भारत आना न सिर्फ रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, बल्कि कच्चे तेल की सप्लाई के लिहाज से भी बड़ी राहत है.

ईरानी कच्चा तेल लेकर दो सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर पहुंचे हैं. इसे मई 2019 के बाद ईरानी क्रूड की सबसे बड़ी डिलीवरी माना जा रहा है. उस समय अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल आयात लगभग बंद कर दिया था.

गुजरात के सिक्का पोर्ट पर लगा पहला सुपरटैंकर

नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित बेहद बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज ‘फेलिसिटी' रविवार देर रात गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर पहुंचा. इस जहाज में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था, जिसे मार्च के मध्य में ईरान के खार्ग द्वीप से लोड किया गया था.

ओडिशा के पारादीप के पास दूसरा जहाज

इस खेप का दूसरा हिस्सा लेकर ‘जया' नाम का पोत ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास देखा गया. इस जहाज में भी करीब 20 लाख बैरल ईरानी क्रूड मौजूद है, जिसे फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से उठाया गया था. यह उस समय लोड हुआ था, जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव अभी इतने चरम पर नहीं था.

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अमेरिका‑ईरान तनाव के बीच बढ़ी अनिश्चितता

हालांकि इस पूरी आपूर्ति के बीच हालात पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते. वीकेंड में शांति वार्ता टूटने की खबरों के बाद स्थिति और अनिश्चित हो गई. वॉशिंगटन ने ईरान के तेल निर्यात से होने वाली कमाई पर रोक लगाने के लिए ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक करने की घोषणा की है, जिससे आगे की सप्लाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

कौन खरीद रहा है ईरानी तेल?

कार्गो के खरीदारों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई नाम सामने नहीं आया है. हालांकि, पारादीप पोर्ट मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित किया जाता है, जिसने यह पुष्टि की है कि उसने छूट के तहत कम से कम एक ईरानी शिपमेंट खरीदा है. वहीं, सिक्का पोर्ट रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए बड़ा क्रूड‑हैंडलिंग हब है.

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2019 के बाद ईरानी क्रूड की वापसी

यह डिलीवरी 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत में ईरानी तेल आयात रुकने के बाद पहली बड़ी वापसी को दिखाती है. प्रतिबंधों से पहले भारत ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल था और ईरान लाइट व ईरान हेवी ग्रेड का बड़े पैमाने पर आयात करता था.

एक दौर में भारत की जरूरत का बड़ा हिस्सा

अपने चरम पर, ईरानी कच्चा तेल भारत के कुल तेल आयात का करीब 11.5 प्रतिशत हुआ करता था. साल 2018 में भारत रोज़ाना करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल मंगा रहा था, जो 2019 की शुरुआत में अमेरिकी अस्थायी छूट के दौरान घटकर करीब 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था.

पेमेंट दिक्कतों की वजह से पहले लौटी थी खेप

इससे पहले, ईरानी क्रूड से लदा ‘पिंग शुन' टैंकर, जिसमें लगभग 6 लाख बैरल तेल था और जो गुजरात के वडिनार जा रहा था, भुगतान संबंधी परेशानियों के कारण भारत की बजाय चीन भेज दिया गया था.

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