महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन कैसे हिंसा में बदला? चश्मदीद ने सुनाई आंखों‑देखी कहानी

चश्मदीद ने सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई कि हिंसा में शामिल कुछ तत्वों ने मस्जिदों और पवित्र श्राइन पर हमला किया. उन्होंने कहा कि जो लोग मस्जिद और श्राइन जला रहे थे, वो शिया मुसलमान नहीं हो सकते.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
ईरान से आए शख्स ने बताई आंखों देखी
NDTV
नई दिल्ली:

ईरान में महंगाई के खिलाफ शुरू हुए लोगों के विरोध प्रदर्शन ने पिछले दिनों अचानक उग्र रूप ले लिया. कई शहरों में हिंसा भड़क उठी, जिसमें कई लोगों की मौतें भी हुईं. इस पूरे घटनाक्रम को बेहद करीब से देखने वाले एक भारतीय नागरिक अमरेश मिश्रा हाल ही में ईरान से भारत लौटे हैं..वो ईरान के अंदर कासिम सुलेमानी की बरसी में हुए सेमिनार में शामिल होने गए थे.NDTV संवाददाता अली अब्बास नक़वी ने उनकी एक्सक्लूसिव बातचीत आप तक पहुंचाई जिसमें चश्मदीद ने वहां के माहौल, हिंसा, अफवाहों, और सरकार की कार्रवाइयों पर विस्तार से बताया.

 महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन

चश्मदीद के अनुसार, ईरान में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया. बुनियादी ज़रूरतों के दाम आसमान छूने लगे थे और शुरुआत में लोगों का उद्देश्य सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति के प्रति नाराज़गी जताना था. आंदोलन शुरुआती दिनों में शांतिपूर्ण था—लोग सिर्फ सरकार के आर्थिक फैसलों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे लेकिन इसमें दंगाई ने जगह बनाली. 

सरकार ने दी तीन राहत स्कीमें

बढ़ते दबाव को देखते हुए ईरानी सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए तीन खास स्कीमें भी लागू कीं. ये स्कीमें महंगाई से जूझ रहे परिवारों को आर्थिक सहारा देने के लिए पेश की गई थीं. अमरेश के मुताबिक, इन स्कीमों से लोगों में कुछ हद तक उम्मीद भी जगी थी, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते चले गए.

विदेशी तत्वों की भूमिका, तनाव बढ़ा

चश्मदीद का दावा है कि प्रदर्शन में बाहरी देशों के लोग भी शामिल होने लगे, जिसने हालात को और खराब कर दिया. उनका कहना है कि “जो लोग हिंसा कर रहे थे, उनमें कई ईरानी नहीं लग रहे थे. इससे स्थानीय लोगों में भ्रम और गुस्सा दोनों बढ़ गया. उन्होंने यह भी बताया कि लोग महंगाई से परेशान थे, लेकिन आयतुल्लाह खामेनेई के विरोध में नहीं थे.

शाह रज़ा पहलवी के भाषण ने हालात भड़काए

उन्होंने बताया कि शाह रज़ा पहलवी के भड़काऊ भाषण के बाद हालात अचानक बेकाबू हो गए. प्रदर्शन की दिशा सिर्फ महंगाई से हटकर राजनीतिक रंग लेने लगी. इस भाषण का असर यह रहा कि भीड़ के कुछ समूह अचानक हिंसक हो उठे और कई जगह तोड़फोड़ शुरू हो गई.

मस्जिद और श्राइन पर हमले – चश्मदीद का दावा

चश्मदीद ने सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई कि हिंसा में शामिल कुछ तत्वों ने मस्जिदों और पवित्र श्राइन पर हमला किया. उन्होंने कहा कि जो लोग मस्जिद और श्राइन जला रहे थे, वो शिया मुसलमान नहीं हो सकते. कोई भी असली मुस्लिम ऐसा नहीं कर सकता.इन हमलों ने ईरान में तनाव को और ज्यादा भड़का दिया और सुरक्षा बल हरकत में आ गए.

Advertisement

3 साल की बच्ची को गोली मारी

हिंसा के बीच एक तीन साल की बच्ची को गोली लगने की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. दंगाईयो की गोली से 3 साल की बच्ची की भी मौत हो गई.अमरेश की आवाज इस घटना को बताते समय भारी पड़ गई. उन्होंने कहा कि जिस तरह गाज़ा में बच्चों को मारा गया.उसी तरह ही इस बच्ची की मौत से गाज़ा के बच्चे की याद आ गई.

200 से अधिक गिरफ्तारियां

हिंसा के अचानक फैलने के बाद ईरानी सुरक्षा बलों ने देशभर में कड़ी कार्रवाई की.200 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. जिनमें कई बाहरी तत्व भी बताए जाते हैं. सुरक्षा एजेंसियां अब भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं.

Advertisement

विदेशी ताकत शिया विचारधारा के खिलाफ है

अमरेश ने कहा कि इन लोगों की विचारधारा शिया के खिलाफ है और बाहरी ताकतें और दूसरे देश ईरान में आयतुल्लाह खुमेनी के द्वारा लाए गए इंकलाब के खिलाफ है. इन सब के पीछे विदेशी ताकते हैं जो ईरान की तरक्की नहीं चाहती है. तभी इतने सेंक्शन लगे हुए है जिससे महंगाई भी बड़ी और ये ईरान के हालात हुए.

यह भी पढ़ें: Iran Protests: महंगाई की आग में उबल रहा ईरान! सड़कों पर उतरा गुस्‍सा, 6 की मौत, नहीं थम रहा बवाल

Advertisement

यह भी पढ़ें: वेस्टर्न देशों से भी ज्यादा मॉडर्न था कट्टरपंथी देश बन चुका ईरान, महिलाओं को मिली थी आजादी

Featured Video Of The Day
BMC Elections: Nitesh Rane बोले- 'हमारा मेयर बनते ही बांग्लादेशी को वापस भेजेंगे' | NDTV Power Play
Topics mentioned in this article