होर्मुज में हमने भारतीय जहाजों को दिया सुरक्षित रास्ता, तेहरान ने निभाई दोस्ती: ईरानी राजनयिक

ईरानी महावाणिज्य दूत ने कहा है कि तेहरान भारत में गैस की कमी को लेकर चिंतित है, इसलिए युद्ध के बावजूद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलने दिया जा रहा है. हाल ही में 'नंदा देवी' और 'शिवालिक' जैसे टैंकर सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे हैं.

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का फैसला भारत के साथ दोस्ती को दर्शाता है
  • इस सप्ताह भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर पश्चिमी तट के वाडिनार और मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुंचे
  • ईरान ने आरोप लगाया कि इजरायल ने उसके तेल ठिकानों पर हमला कर युद्ध की शुरुआत की और जवाबी कार्रवाई की
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायब मोतलघ ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का तेहरान का फैसला नई दिल्ली के साथ उसकी लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को दर्शाता है. मोतलघ ने कहा कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र और साझेदार रहा है और तेहरान के अधिकारी मौजूदा संघर्ष के बीच भारत में गैस की कमी की स्थिति को लेकर चिंतित थे.

'भारत-ईरान मित्र और साझेदार'

सईद रजा मोसायब मोतलघ ने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने शुरुआत से ही यह दिखाया है कि वह भारत का मित्र और साझेदार है. व्यक्तिगत रूप से, मुंबई में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के महावाणिज्य दूत के रूप में, जब मैंने लोगों को गैस की कमी का सामना करते देखा, तो मुझे गहरी चिंता हुई. स्वाभाविक रूप से, ईरान के अधिकारी भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और मदद करना चाहते हैं. जैसा कि आप जानते हैं, स्थिति प्रभावी रूप से युद्ध क्षेत्र जैसी है और गैस ले जाने वाले जहाजों के अपने जोखिम हैं. छोटी से छोटी घटना भी गंभीर परिणाम ला सकती है. हालांकि ईश्वर की कृपा से ईरान सुरक्षित मार्ग प्रदान करने में सक्षम रहा ताकि ये जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें. यह हमारी भारत के साथ दोस्ती को दर्शाता है.'

लगातार भारत पहुंच रहे हैं जहाज

इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी' गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर पहुंचा, जो इस सप्ताह पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला दूसरा एलपीजी कैरियर बना. इससे पहले ‘शिवालिक' मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था. अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की. दोनों जहाज महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति लेकर भारत पहुंचे, जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर एक असामान्य रूप से खतरनाक मार्ग से गुजरे, जहां ईरान, अमेरिका और इज़रायल से जुड़े चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बाधित हुआ है.

'इजरायल ने ईरान के तेल ठिकानों को बनाया निशाना'

मोतलघ ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया और 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की हत्या कर युद्ध की शुरुआत की. इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जो अमेरिका और इजरायल की सुविधाओं, उनके सैन्य बेस और पश्चिम एशिया में सहयोगी बलों को निशाना बनाकर किए गए.

Advertisement

'हमने कभी पहले हमला नहीं किया'

उन्होंने कहा, 'मैं इस्लामी क्रांति के महान नेता ग्रैंड अयातुल्लाह खामेनेई की स्मृति और नाम का सम्मान करता हूं, साथ ही ईरानी राष्ट्र की मजबूत इच्छाशक्ति का भी, जिसने सभी कठिनाइयों के बीच अकेले खड़े होकर, ईश्वर की कृपा और शक्ति से इन चुनौतियों को एक-एक करके पार किया है. जहां तक विनाश की बात है, इजरायल ने सबसे पहले हमारे तेल ठिकानों पर हमला किया. हमारी शांतिपूर्ण और शांति चाहने वाली प्रकृति को देखते हुए, हमने उन्हें पहले ही सूचित किया था और हम युद्ध में भी इसी नजरिए को बनाए रखते हैं. हमने कभी पहले हमला नहीं किया. उन्होंने युद्ध की शुरुआत की, इस्लामी गणराज्य के नेता को निशाना बनाया और हमने पहले चरण में जोरदार जवाब दिया.'

उन्होंने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत को बहुत बड़ी क्षति बताया और उन्हें देश के प्रमुख राजनेता के रूप में सराहा. उन्होंने कहा कि लारीजानी की मौत के बाद भी ईरान प्रभावी ढंग से काम कर रहा है और युद्ध में जुटा है क्योंकि देश में व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यवस्था शासन करती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: अमेरिका के सुपर फाइटर जेट F-15 को मार गिराया, ईरान का बड़ा दावा

'ईरान को व्यक्ति नहीं व्यवस्था चलाती है'

उन्होंने कहा, 'ईरान के लिए किसी भी ईरानी नागरिक को नुकसान होना एक क्षति और गहरे दुख का कारण है, चाहे वह मामूली चोट ही क्यों न हो. जब हमारे नागरिक आक्रामकता और युद्ध के कारण शहीद होते हैं तो यह और भी बड़ा दुख होता है, जिसे अमेरिका और जायोनी शासन ने भड़काया है. क्या ऐसी घटनाएं हमारे संकल्प को कमजोर करती हैं? तो मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं, नहीं. जब हमारे नेता शहीद हुए, तो सभी ने देखा कि एक व्यवस्था देश को संचालित करती है, जिसने तुरंत एक सक्षम उत्तराधिकारी को स्थापित किया और कोई व्यवधान नहीं हुआ.'

उन्होंने आगे कहा, 'हालांकि उनका नुकसान हमारे दिलों में बना हुआ है, हम उनकी महान आत्मा और वर्षों तक ईरान के लिए दी गई सेवाओं के लिए आभारी हैं, जिनके प्रभाव आज भी दिखाई देते हैं. जहां तक शहीद लारीजानी की बात है, उनका निधन वास्तव में एक बड़ी क्षति है. वह हमारे देश के प्रमुख राजनेताओं में से एक थे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थे. हालांकि, यह क्षति व्यवस्था को बाधित नहीं करती. जैसा कि आप देख सकते हैं, उनकी शहादत के सिर्फ दो दिन बाद भी देश काम कर रहा है और युद्ध का प्रभावी ढंग से संचालन किया जा रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे देश में व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यवस्था शासन करती है.'

मोतलघ ने कहा, 'अमेरिकी दुनिया के सामने हॉलीवुड जैसी छवि पेश करते हैं, यह दिखाने के लिए कि उनकी सेनाएं अजेय हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता, और उनके पास श्रेष्ठ तकनीक है. लेकिन यह वास्तविकता नहीं है. ईरान भी युद्ध के मैदान में एडवांस तकनीक का उपयोग करता है और इसके परिणाम दुनिया भर के लोगों के सामने स्पष्ट हो चुके हैं. हमने उनके कई जहाजों को नष्ट किया है, जिनमें विमानवाहक पोत और ईंधन जहाज शामिल हैं, यहां तक कि उन्हें युद्ध क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. हमारी हालिया उपलब्धियों में से एक F-35 लाइटनिंग II को मार गिराना बताया जा रहा है, जिसकी कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर बताई जाती है.'

यह भी पढ़ें: ईरान के बाद कहां युद्ध? ग्रीनलैंड, क्यूबा, ताइवान, कोरिया...195 देशों की दुनिया में 100 से ज्यादा सीमा विवाद

Advertisement

यह भी पढ़ें: इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह कमांडर को मार गिराने का किया दावा

Featured Video Of The Day
West Bengal Elections 2026 Exit Poll Results: बंगाल में पहली बार BJP बहुमत के करीब? Mamata Banerjee