Israel-Iran war Impact on India: मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है. इन सभी बातों ने भारत के सामने सामरिक मोर्चे पर चुनौतियां पेश कर दी हैं. जेएनयू के वेस्ट एशियन स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुदस्सिर कमर ने एनडीटीवी से कहा कि यह स्थिति भारत के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.
'90 लाख भारतीयों की सुरक्षा की चुनौती'
खाड़ी देशों में भारत की एक विशाल आबादी रहती है. डॉ. कमर के अनुसार, "करीब 90 लाख भारतीय वर्कर और स्टूडेंट रहते हैं. उनकी सुरक्षा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भारत को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना होगा, जिससे जिससे गल्फ रीजन में भारतीय समुदाय का हित कमजोर हो."
Israel-Iran war Impact on India
'कच्चे तेल की कीमतों का संकट'
जब से इजरायल ने ईरान पर हमला किया है तभी से कच्चे तेल की कीमतों पर सभी की नजरें जमी हुई हैं. डॉ. मुदस्सिर कमर के अनुसार, "भारत अपनी जरूरत का करीब 40 से 50 फीसदी कच्चा तेल मध्य एशिया के देशों से आयात करता है. युद्ध के लंबा खिंचने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है." यानी तेल महंगा होने का सीधा मतलब है भारत का आयात बिल बढ़ना, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा.
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'भारत के ईरान और इजरायल के बीच संतुलन की चुनौती'
भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों के साथ बेहद करीबी हैं. एक तरफ जहां इजरायल भारत का बड़ा रक्षा भागीदार है, वहीं ईरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के हिसाब से जरूरी है. डॉ. कमर का मानना है कि भारत को एक डिप्लोमैटिक टाइट्रोप पर चलना होगा. यानी भारत ना तो ईरान को पूरी तरह छोड़ सकता है और ना ही इजरायल से दूरी बना सकता है.
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