EID इस बार कैसे मनाएं? देश के 5 बड़े मुस्लिम स्कॉलर और मौलाना की सलाह पढ़िए, सबने किया आगाह

ईद पर खुशियां मनाई जाती हैं. लेकिन दुनिया गम में है. खासकर मुस्लिम वर्ल्ड में कोहराम मचा हुआ है. पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है. मुस्लिम देश ही एक दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं. जाहिर है मौहाल खराब है, ऐसे में इस बार ईद पर क्या करना चाहिए. यही बात हमने देश के कुछ मुस्लिम विद्वानों और धर्मगुरुओं से पूछी. देखिए मुस्लिम उम्माह के लिए क्या है इनकी सलाह.

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Eid 2026: ईद पर खुशियां मनाई जाती हैं. लेकिन दुनिया गम में है. खासकर मुस्लिम वर्ल्ड में कोहराम मचा हुआ है. पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है. मुस्लिम देश ही एक दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं. पवित्र स्थलों पर भी हमले हो रहे हैं. ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमला कर दिया है. युद्ध लंबा खिंच रहा है और तबाही बदस्तूर जारी है. उधर ईरान कतर, सऊदी, ओमान आदि पर हमले कर रहा है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए हैं. हिंदुस्तान पर भी असर है, हिंदुस्तान के हजारों लोग जिसमें से ज्यादातर मुस्लिम है गल्फ के देशों में फंसे हैं. किसी का बेटा वहां अटक गया है तो किसी के वालिद नहीं आ पाए हैं. इस युद्ध के कारण तेल और खासकर LPG संकट है हिंदुस्तान की रसोइयों तक पहुंच चुका है. जाहिर है मौहाल खराब है, ऐसे में इस बार ईद पर क्या करना चाहिए. यही बात हमने देश के कुछ मुस्लिम विद्वानों और धर्मगुरुओं से पूछी. देखिए मुस्लिम उम्माह के लिए क्या है इनकी सलाह.

मौलाना मोहसिन तकवी ,पेश इमाम, दिल्ली शिया जामा मस्जिद 

आयतुल्लाह खामेनेई का जाना बहुत बड़ा गम है. ईद बस हम सादगी के साथ ही मनाएंगे. मौलाना मोहसिन तकवी की सलाह है कि ग़म का इजहार जरूर करें लेकिन शांति के साथ ही ईद मनाई जाए. मोहसिन नकवी ने अपील की है कि इस बार ईद मिलन जैसे प्रोग्राम से बचा जाए, लेकिन नमाज, दुआ जरूर करें.

मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी

इस्लामिक स्कॉलर डॉ मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी ने कहा कि इस्लाम अमन, इत्तेहाद, इंसानियत के लिए खुशहाली का मजहब है. ईद में दूसरे के चेहरे पर कितनी खुशी दिख रही है, वो भी मायने रखती है. मस्जिद तक जाते हुए या मस्जिद से घर तक पहुंचते हुए अगर कहीं नफरत का कोई शैतानी चेहरा सामने आए तो लाहौल पढ़ना न भूलें.

मौलाना ने कहा कि घर में जब कोई अपना बड़ा दुनिया से चला जाता है तो ईद बस मर्जी ए मौला के लिए मनाई जाती है. ईद के दो मतलब है एक समाजी ईद और एक मजहबी ईद. समाजी ईद में नए कपड़े रोशनी, खुशियां,पकवान बनाए, शॉपिंग आदि की जाती है. वहीं, मजहबी ईद में जियारत ए आशूरा पढ़ें, दूसरे के लिए दुआ करें, कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ें, लोगों की मदद करें, यानी इस बार सिर्फ मजहबी ईद मनाएं.

अजमेर से सटे दौराई गांव में इस बार ईद‑उल‑फितर की रौनक नहीं, बल्कि गम का माहौल है. शिया समाज ने अपने धर्मगुरु अयातुल्ला अली खामेनेई की युद्ध में मौत की खबरों के बाद ईद न मनाने का फैसला किया है. गांव में बाजार सूने हैं, लोग शोक की तैयारी में काली पट्टी बांध रहे हैं और रोजा मस्जिद में शोक सभा आयोजित की गई. समाज का कहना है कि यह समय जश्न का नहीं, बल्कि दुख और आत्ममंथन का है.

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मौलाना यासूब अब्बास, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव

सादगी से ईद मनाएं, इबादत करें, सिर्फ पुराने साफ पाक कपड़े पहनकर ईद मनाएं. ईद तो तभी मनेगी जब जुल्म करने वालों को सजा मिलेगी. इस बार ईद पर जो दीनी काम अल्लाह, रसूल, और इस्लाम ने कहा है सिर्फ उसी पर अमल करें.

डॉ गुलाम रसूल देहलवी, सुन्नी सूफी मुस्लिम स्कॉलर 

जब पूरी इस्लामी दुनिया में खून बह रहा है तो ईद कैसे मना सकते हैं? मुस्लिम उम्माह का अस्तित्व खतरे में है. पहला किबला यानी बैतूल मुकद्दस बंद है. दूसरा किबला भी सुरक्षित नहीं है. अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब इस्लाम को चुनौती दे रहे हैं . पिछले दो वर्षों में ही पैगंबर मुहम्मद (अल्लाह उन पर शांति और आशीर्वाद बरसाए) को गौरव दिलाने वाले लाखों लोगों को अन्यायपूर्वक मार डाला गया है. ईरान में निर्दोष मासूम बच्चियां इजरायली आक्रमण का शिकार हो गई हैं. अफगानिस्तान में अस्पताल नष्ट हो गए हैं, जिनमें निर्दोष बच्चे भी शामिल हैं और इन सबके ऊपर, सर्वोच्च नेता की शहादत!

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डॉ.मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क, इस्लामिक स्कॉलर 

चेयरमैन इंडिया ख़ैबर शिकन अकादमी लखनऊ कहते हैं कि ईद इस्लामी दुनिया में सबसे बड़ी इबादत में से एक है. ईद खुशियों का त्यौहार है लेकिन इस बार सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर दुख जताना भी ज़रूरी है. उन्होंने मुसलमानों से गुज़ारिश की है कि वे ईद की नमाज़ पढ़ें लेकिन सादगी से ईद मनाएं और अपनी बाहों पर काली पट्टी बांधकर अत्याचारीयों के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराएं.

ज़मीर जाफरी

ईरान के कुम में अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी के स्कॉलर मौलाना जमीर जाफरी कहते हैं कि नमाज पढ़ना, लोगों से मिलना, दुआ करना ये सब जरूर करें लेकिन इतनी शहादतों के बीच ईद पर खुशी नहीं मना सकते. जब गाजा में बच्चे मर रहे थे तब भी ईद मनाई गई लेकिन खुशी नहीं मनाई गई. मुस्लिम अगर परेशान है, उसपे जुल्म हो रहे तो कैसे हम ईद की खुशी मना सकते हैं. एहकम के मुताबिक ईद मनानी चाहिए लेकिन खुशी नहीं.

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