भारत में इस साल 21 मार्च को ईद, लेकिन इस वजह से खुशियां नहीं मना रहे हैं मुस्लिम 

इस्लामिक स्कॉलर डॉ मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी ने कहा कि इस्लाम अमन, इत्तेहाद, इंसानियत के लिए खुशहाली का मजहब है, आपके ईद में दूसरे के चेहरे पर कितने खुशी जा रही है वो भी मायने रखती है.

विज्ञापन
Read Time: 7 mins

इस साल 2026 में ईद-उल-फितर का त्योहार बहुत अलग होने वाला है. इस साल भारत में 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी लेकिन इस बार पूरे भारत में मुसलमानों के बीच ईद की खुशियाँ कम दिख रही हैं. खासकर शिया एवं सुन्नी सूफी मुसलमानों ने ऐलान किया है कि वे इस बार ईद खुशियों के साथ नहीं मनाएंगे.आखिर क्यों इस तरह पहली बार ईद के बारे में मुस्लिमों की तरफ से बयान आ रहा है.पढ़िए एनडीटीवी की भारत के मशहूर मुस्लिम धर्मगुरुओं से इस मुद्दे पर खास बातचीत

 अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत के बाद देशभर में शौक की लहर 

रमजान महीने के 10वें रोज़े में ही इजरायल अमेरिका के द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत हो गई थी, जिसके बाद हिंदुस्तान भर में लोगों ने सड़कों पर अमेरिका इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.ग़म इतना था कि सड़कों पर ही महिलाएं, पुरुष कूट कूट के रोते हुए दिखे, वहीं सिर्फ शिया ही नहीं सुन्नी, हिंदू, सिख भी इस गम में शामिल हुए..वहीं इस गम को देखकर ईरान ने खुद भारत के लिए शिप को आने की इजाजत तक दे दी. वहीं शिया और सुन्नी स्कॉलर की बात करें तो उन सब ने पूरी तरह से ईद की खुशियां न मनाने की अपील की है.

 क्या क्या होगा इस बार चेंज

हर साल लोग खुशियों के साथ ईद को मनाते थे, ईद मिलन, न्यू कपड़े, शॉपिंग आदि करते थे लेकिन इस बार सब फीका है.रमजान महीने में 160 से ज्यादा मासूम बच्चों की ईरान में मौत और ईरान में कई वरिष्ठ नेता जिनमें अयातुल्लाह खामेनेई की शहादत ने मुस्लिमों की खुशियों को कम कर दिया.इस बार उनकी शहादत के गम में शिया मुसलमान मातम मना रहे हैं.इसलिए उन्होंने फैसला किया है कि नए कपड़े नहीं पहनेंगे और न ही जश्न मनाएंगे.सिर्फ नमाज पढ़ेंगे और दुआ करेंगे.

दिल्ली शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोहसिन तकवी ने कहा की आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत हो जाना, ये गम बहुत बड़ा है, ईद बस हम सादगी के साथ ही मनाएंगे, क्योंकि इस गम को दूर भी कर दें तो तब भी खामेनई साहब की तस्वीर हमारे ज़हनों से नहीं दूर हो सकती, ग़म के इजहार जरूर करें लेकिन शांति के साथ ही ईद मनाई जाएं.ईद मिलन जैसे प्रोग्राम से बचा जाए.अपनी नमाज, दुआ जरूर करें .

वहीं, सुन्नी सूफी मुस्लिम स्कॉलर डॉ गुलाम रसूल देहलवी कहते हैं कि जब पूरा इस्लामी जगत और मानवता रक्तपात की स्थिति में है, तब हम ईद कैसे मना सकते हैं? मुस्लिम उम्माह का अस्तित्व चकनाचूर हो चुका है। पहला किबला यानी बैतूल मुकद्दस बंद है.दूसरा किबला भी सुरक्षित नहीं है. सऊदी अरब, ज़ायोनी और आधुनिक टेम्प्लर्स मिलकर इस्लाम के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं। पिछले दो वर्षों में ही पैगंबर मुहम्मद (अल्लाह उन पर शांति और आशीर्वाद बरसाए) को गौरव दिलाने वाले लाखों लोगों को अन्यायपूर्वक मार डाला गया है.गांव तबाह हो गए हैं. ईरान में निर्दोष मासूम बच्चियां इजरायली आक्रमण का शिकार हो गई हैं.अफगानिस्तान में अस्पताल नष्ट हो गए हैं, जिनमें निर्दोष बच्चे भी शामिल हैं. और इन सबके ऊपर, सर्वोच्च नेता की शहादत!

Advertisement

ईद में नफरती ताकतों को न बढ़ने दें - मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी

वहीं इस्लामिक स्कॉलर डॉ मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी ने कहा कि इस्लाम अमन, इत्तेहाद, इंसानियत के लिए खुशहाली का मजहब है, आपके ईद में दूसरे के चेहरे पर कितने खुशी जा रही है वो भी मायने रखती है.मस्जिद तक जाते हुए या मस्जिद से घर तक पहुंचते हुए अगर कहीं नफरत का कोई शैतानी चेहरा सामने आए तो लाहौल पढ़ना न भूलें.और अपना मकसद याद रखें कि हम इस मुल्क के सिर्फ फूल नहीं गुलशन की जान है.किसी के बाप का नहीं ये हमारा ही हिंदुस्तान है.वहीं शिया कौम के लिए मौलाना ने कहा कि घर में जब कोई अपना बड़ा दुनिया से चला जाता है तो ईद बस मर्जी ए मौला के लिए मनाई जाती है. यानी ईद के दो मतलब है एक समाजी ईद और एक मजहबी ईद.समाजी ईद में नए कपड़े रोशनी, खुशियां,पकवान बनाए, शॉपिंग आदि की जाती है. और मजहबी ईद में जियारत ए आशूरा पढ़ें, दूसरे के लिए दुआ करें, कब्रिस्तान में फातिहा पढ़ें, लोगों की मदद करें, यानी इस बार सिर्फ मजहबी ईद देखने को मिलेगी.

लखनऊ में दिखेगा ईद का अलग मंजर

वहीं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि एक चीज है धर्म और दूसरी चीज है रस्म और रिवाज, रस्मों ने मजहब को पूरी तरह से हाई जेक कर लिया है..लिहाजा रस्मों को छोड़कर सादगी से ईद मनाएं, जो दीनी काम जो अल्लाह, रसूल, और इस्लाम ने कहा है सिर्फ उसी पर अमल करें..और इस साल सिर्फ सादगी से मनाएं इबादत करें, सिर्फ पुराने साफ पाक कपड़े पहनकर ईद मनाएं. ये शहादत हम सब का बहुत बड़ा गम है. और ये गम जभी खत्म होगा यानी हमारी ईद तभी मनेगी जब नेतनयाहू और ट्रंप को हम मरता हुआ देखेंगे.

Advertisement

वहीं इस्लामिक स्कॉलर डॉ.मिर्ज़ा शफ़ीक हुसैन शफ़क , चेयरमैन इंडिया ख़ैबर शिकन अकादमी लखनऊ कहते हैं कि ईद इस्लामी दुनिया में सबसे बड़ी इबादत में से एक है और ईद मनाकर ईद की खुशी ज़ाहिर करना ज़रूरी है, लेकिन मौजूदा हालात में, जब हमने अपने सुप्रीम लीडर को खो दिया है, तो सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर दुख जताना भी ज़रूरी है. मैं सभी मुसलमानों से गुज़ारिश करता हूँ कि वे ईद की नमाज़ पढ़ें लेकिन सादगी से ईद मनाएँ और अपनी बाहों पर काली पट्टी बाँधकर अत्याचारी शासकों के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराएं.

भारत से लेकर ईरान तक गम के साथ से मनाएंगे ईद - ज़मीर जाफरी

ईरान के कुम में अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी के स्कॉलर मौलाना जमीर जाफरी कहते हैं कि ईद मनाना चाहिए या नहीं ये हम किस तरह सोच सकते हैं.नमाज पढ़ना, लोगों से मिलना, दुआ करना ये सब जरूर करें लेकिन जिस तरह हजारों लोगों की शहादत हो रही है.जंग के बीच में किस तरह खुशी मना सकते हैं.गाजा में बच्चे मर रहे थे तब भी ईद मनाई लेकिन खुशी नहीं मनाई, क्योंकि मुस्लिम अगर परेशान है, उसपे जुल्म हो रहे तो कैसे हम ईद की खुशी मना सकते हैं.यहां रहबर हमारे शहीद हो गए हैं तो किस तरह खुशी मना सकते हैं.. एहकम के मुताबिक ईद मनानी चाहिए लेकिन खुशी नहीं.हालांकि कई सुन्नी मुस्लिम ईरान का विरोध भी करते हुए नजर आए हैं. 

ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति से भी माहौल गंभीर है.खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय मुसलमान परिवार से दूर हैं. फ्लाइट कैंसल होने से घर नहीं आ पा रहे. इससे भी ईद की खुशी कम हो गई है.ईरान में भारतीय छात्र, दुबई, कतर, सऊदी गल्फ देशों में भारतीय लोग ईद मनाने अपने घर भी नहीं आ पा रहे हैं.

वहीं ईरान में फंसे छात्र अभी बॉर्डर पर हैं, और फ्लाइट कैंसल होने की वजह से भी उनके परिवार और वो सब परेशान है.सऊदी में रहने वाले राजू जो वहां काम करते हैं हर साल ईद पर अपने घर आते थे, वहीं जंग की वजह से न वो यहां आ पाएं जिससे उनके बच्चे ईदी के इंतजार में अपने पिता की राह दिल्ली में देख रहे हैं.वहीं देखा जाए तो कोरोना के बाद इस तरह ग़म के साथ ईद अब मनाई जा रही है जिसमें खुशी नहीं गम ही नजर आ रहा है.

यह भी पढ़ें: Eid 2026: ईद के मौके पर Google Gemini से बनाएं शानदार फोटोज, ये रहे 5 AI प्रॉप्ट्स, तस्वीरें देख हर कोई करेगा तारीफ

Advertisement

यह भी पढ़ें: Eid Ul Fitr 2026: कब होगा ईद के चांद का दीदार, नोट कर लें टाइम, भारत में इस दिन मनेगी ईद

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: Nuclear पर एंकर ने PAK पैनलिस्ट को दिखाया आईना! | Sucherita Kukreti | Pakistan
Topics mentioned in this article