- इंदौर से हैदराबाद तक बन रहा एक्सप्रेसवे तीन राज्य मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच कनेक्टिविटी करेगा
- इसमें खंडवा से नांदेड तक तीनों राज्यों के 15 शहर जुड़ेंगे और कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
- इंदौर से हैदराबाद का सफर 16 घंटे का सफर 7 घंटे में पूरा होगा.
इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे तीन राज्य मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाएगा. इंदौर से हैदराबाद की दूरी लगभग 954 किलोमीटर है. पहले इस यात्रा में 16 घंटे से ज्यादा का समय लगता था. लेकिन कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी 783 किलोमीटर रह जाएगी और समय घटकर 7 घंटे तक हो जाएगा. 171 किलोमीटर दूरी कम होगी, दोनों शहरों के बीच यात्रा में 9 घंटे की समय बचत होगी. तीन राज्यों के बीच बनने वाला यह ग्रीनफील्ड हाईवे है जो खंडवा, बुरहानपुर, नांदेड़ 20 शहरों के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी बढ़ाएगा. यह एक ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड हाईवे, जिसे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा हैं. यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सीधे जोड़ देगा.
4 लेन हाईवे हो रहा तैयार
यह राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के भारतमाला परियोजना के तहत तैयार किया जा रहा है. यह चार लेन सेमी-एक्सेस कंट्रोल्ड आर्थिक गलियारा है. इसका उद्देश्य मध्य भारत को दक्षिण भारत से तेज, सुरक्षित और आधुनिक सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है. जिसका 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. तेलंगाना के हिस्से वाले 96 किलोमीटर लंबे मार्ग का काम पहले ही पूरा हो चुका है. वर्तमान में महाराष्ट्र के अकोला और नांदेड़ जिलों में नए ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड हाईवे पर काम चल रहा है. जबकि एमपी में इंदौर से खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन जिलों में भी काम तेजी से किया जा रहा है. कॉरिडोर कई नए ग्रीनफील्ड और अपग्रेड किए गए हाईवे सेक्शनों का हिस्सा है. जिससे लंबी दूरी का ट्रैफिक शहरों से बाहर होकर तेजी से गुजर सकेगा.
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना के इन शहरों को जोड़ेगा
- इंदौर (मध्य प्रदेश)
- खंडवा
- खरगोन
- बुरहानपुर
- अकोला (महाराष्ट्र)
- वाशिम
- हिंगोली
- नांदेड़
- कामारेड्डी (तेलंगाना)
- मेडक
- संगारेड्डी
- हैदराबाद
एमपी-महाराष्ट्र-तेलंगाना की कनेक्टिविटी
यह इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक सड़क नहीं है. बल्कि तीन राज्य मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच सड़क कनेक्टिविटी को तेज कर देगा.जिससे तीन राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को एक मजबूत परिवहन नेटवर्क उपलब्ध कराएगा. इसके बनने से माल परिवहन की लागत घटेगी, ईंधन की बचत होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे. ऐसे में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है.
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इंदौर-हैदारबाद को बड़ा फायदा
इंदौर–हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि मध्य और दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर है. इसके पूरा होने पर इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, नांदेड़, मेडक और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के बीच आवागमन तेज होगा, उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूत आधार प्राप्त होगा. जबकि पातालपानी, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, चारमीनार, गोलकोंडा किला और रामोजी फिल्म सिटी जैसे पर्यटन स्थलों की दूरी भी कम हो जाएगी.
तीन सुरंगों का निर्माण
इंदौर-हैदराबाद हाईवे के लिए तीन अहम सुरंगों का निर्माण भी हो रहा है. जहां इंदौर के तेजाजी नगर से खरगोन जिले के बलवाड़ा के बीच 33.40 किलोमीटर काम सबसे अहम है. यह रास्ता दुर्गम पहाड़ी इलाकों से गुजरता है. ऐसे में यहां सुरंग का निर्माण हो रहा है. इस कॉरिडोर में 575 मीटर लंबी भेरूघाट सुरंग, 550 मीटर लंबी चोरल घाट सुरंग और 480 मीटर लंबी बाईग्राम सुरंग शामिल है. यह पूरा इलाका दुर्गम पहाड़ियों से गुजरता है, ऐसे में यहां राजमार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए काम पूरा किया जा रहा है. साथ ही यह कॉरिडोर कई औद्योगिक क्षेत्रों, एसईजेड, फार्मा क्लस्टर, टेक्सटाइल क्लस्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब और मेगा फूड पार्कों को जोड़ने का काम करेगा.
2026 में शुरू हो सकता है एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे 2026 में शुरू हो सकता है. हालांकि यह 2025 तक ही पूरा होना था, लेकिन टनल और वायडक्ट के काम की वजह से कुछ देरी हुई है. इसकी अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये के पास है. यह मध्य भारत को सीधे दक्षिण भारत से कनेक्ट कर रहा है. ऐसे में यह भारत सरकार का एक अहम प्रोजेक्ट है.