समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत, ब्रह्मोस से लैस स्वदेशी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट तारागिरी होगा नेवी में शामिल

प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित चौथा एडवांस गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट 'तारागिरी' 3 अप्रैल को भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेगा. ब्रह्मोस मिसाइल, वरुणास्त्र टॉरपीडो और आधुनिक रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी तकनीक से बना है.

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  • भारतीय नेवी प्रोजेक्ट 17ए के तहत स्वदेशी नीलगिरी क्लास के युद्धपोत शामिल कर रही है
  • गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को अप्रैल में विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया जाएगा
  • तारागिरी ब्रह्मोस मिसाइल, बराक-8, स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और आधुनिक सोनार तथा रडार से लैस है
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भारतीय नौसेना नीले समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक के बाद एक स्वदेशी युद्धपोत शामिल कर रही है. 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तैयारी तेज हो गई है. लगातार नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में प्रोजेक्ट 17ए के तहत नीलगिरी क्लास का एडवांस गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी नौसेना में शामिल होने जा रहा है. नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अगले महीने यानी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में तारागिरी को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा. इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह स्वयं इस गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट को नौसेना को समर्पित करेंगे. वर्ष 2026 की शुरुआत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप' को भी नौसेना में शामिल किया गया था.

प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे हैं एडवांस वॉरशिप

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल कर लिया गया. अब तारागिरी की बारी है.

क्या है इसकी खासियत?

गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी' ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है, जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है. एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8', एयर डिफेंस गन, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र' और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं.

तारागिरी लंबी दूरी से आने वाले हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है. इस फ्रिगेट में हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं.

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डिजाइन से लेकर स्टील, सब स्वदेशी

प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं. इसका डिजाइन और स्टील भी स्वदेशी है. इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है. 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है.

प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं. इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं. वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है.

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तारागिरी इस तरह का चौथा फ्रिगेट

तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं. इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है. प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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