भारत के वायुसेना को मिलेगा 1000 किलो का स्वदेशी 'बाहुबली' बम, अमेरिकी MK-84 को देंगे टक्कर

भारतीय वायुसेना करीब 600 ऐसे बम खरीद सकती है, जिसे एक बड़ा रक्षा ऑर्डर माना जा रहा है. फिलहाल इस श्रेणी के बम विदेशों से आयात किए जाते हैं, लेकिन अब भारत इन्हें स्वदेश में ही बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
AI की तस्वीर
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारत ने एमके‑84 के समान क्षमता वाले हवाई बम के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया मंत्रालय के तहत शुरू की.
  • इस परियोजना में छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे, जिनमें असली और डमी बम शामिल होंगे, परीक्षण के लिए उपयोग किए जाएंगे.
  • भारतीय वायुसेना लगभग 600 ऐसे बम खरीद सकती है, जिससे विदेशी निर्भरता कम होकर रक्षा क्षमता मजबूत होगी.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

भारतीय वायुसेना के लिए अमेरिका के एमके‑84 के समान 1,000 किलोग्राम क्षमता वाले हवाई बम के स्वदेशी विकास की प्रक्रिया रक्षा मंत्रालय ने शुरू कर दी है. आसान भाषा में इसे “देसी सुपर बम” कहा जा सकता है. यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. इस बम को पूरी तरह देश में ही डिजाइन और विकसित किया जाएगा और इसकी तुलना अमेरिका के एमके‑84 हवाई बम से की जा रही है. इस परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं और इसके तहत एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया गया है. सरकारी और निजी, दोनों ही कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में भाग लेने का अवसर मिलेगा. पूरी योजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है. पहले चरण में बम का डिजाइन और डेवलपमेंट किया जाएगा.

इस चरण के दौरान कुल छह प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जिनमें कुछ असली बम होंगे और कुछ डमी बम. डमी बमों का उपयोग परीक्षण के लिए किया जाएगा, जिससे सुरक्षा मानकों के तहत जांच की जा सके. इसके साथ ही बम के लिए टेल यूनिट भी विकसित की जाएगी, जो बम को लक्ष्य की दिशा में सटीक रूप से गिराने में मदद करेगी.

भारतीय वायुसेना करीब 600 ऐसे बम खरीद सकती है

दूसरे चरण में बमों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके लिए आरएफपी (RFP) यानी प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे. भारतीय वायुसेना करीब 600 ऐसे बम खरीद सकती है, जिसे एक बड़ा रक्षा ऑर्डर माना जा रहा है. फिलहाल इस श्रेणी के बम विदेशों से आयात किए जाते हैं, लेकिन अब भारत इन्हें स्वदेश में ही बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी.

यह हवाई बम विभिन्न प्रकार के फाइटर जेट विमानों से इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसे अलग‑अलग प्लेटफॉर्म पर फिट किया जा सकेगा, जिसमें भारतीय और विदेशी दोनों तरह के विमान शामिल होंगे. इसमें रूस में निर्मित लड़ाकू विमान और राफेल जैसे फाइटर जेट भी शामिल हैं. इससे भारतीय वायुसेना को संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा.

Advertisement

50 प्रतिशत सामग्री भारत में निर्मित होगी

इस परियोजना में स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है और कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री भारत में निर्मित होगी. यह परियोजना “मेक‑II” यानी उद्योग द्वारा वित्त पोषित श्रेणी के तहत शुरू की गई है, जिसमें शुरुआती निवेश कंपनियां स्वयं करेंगी और बाद में सरकार इन बमों की खरीद करेगी. इसे “बाय इंडियन‑IDDM” श्रेणी में रखा गया है.

बड़े लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम होगा

यह बम उच्च विस्फोटक क्षमता वाला होगा और बड़े लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम होगा. इसमें फ्रैगमेंटेशन क्षमता भी होगी, जिससे विस्फोट के बाद इसके टुकड़े दूर तक फैल सकेंगे. यह बंकर, मजबूत इमारतों और रनवे जैसे रणनीतिक ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है. इसमें गाइडेंस किट लगाने की भी व्यवस्था होगी, जिससे यह एक स्मार्ट बम के रूप में काम करेगा. स्मार्ट बम अधिक सटीक हमला करते हैं, जिससे अनावश्यक नुकसान कम होता है.

Advertisement

इस बम की टेस्टिंग भारत में ही की जाएगी और इसे अलग‑अलग विमानों से गिराकर इसकी क्षमता और सटीकता की जांच की जाएगी. परीक्षण के बाद अंतिम मानक तय किए जाएंगे. पूरे प्रोजेक्ट में डिजाइन, टेस्टिंग और अनुबंध प्रक्रिया सहित लगभग ढाई साल का समय लग सकता है. इस परियोजना के पूरा होने से भारत की रक्षा तकनीक और मजबूत होगी और देश आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाएगा.

ये भी पढ़ें :  विडंबना-युद्ध के बीच रूबियो सुना रहे ईशा मसीह की कहानी और पोप की गुहार-जंग रोको

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Israel War: ईरान के जबड़े से पायलट निकाल लाए Trump! | Bharat Ki Baat Batata Hoon
Topics mentioned in this article