भारत सरकार 1 अप्रैल से चीनी कंपनियों हिकविजन, दहुआ और टीपी-लिंक द्वारा बनाए जाने वाले इंटरनेट-कनेक्टेड CCTV कैमरों और वीडियो सर्विलांस उपकरणों की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी में है. यह कदम नए स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन (STQC) नियमों के लागू होने के साथ उठाया जा रहा है, जिसके तहत भारत में CCTV उत्पादों की बिक्री से पहले सरकारी मंजूरी लेना अनिवार्य होगा.
चीनी कंपनियों पर सरकार की सख्ती
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार कनेक्टेड डिवाइसेज की सुरक्षा को लेकर मानकों को सख्त कर रही है. इसी के तहत चीनी कंपनियों के CCTV उत्पादों और चीनी चिपसेट वाले उपकरणों को STQC प्रमाणन देने से इनकार किया जा रहा है. बिना इस मंजूरी के ऐसे उत्पाद भारतीय बाजार में नहीं बिक सकेंगे.
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यह फैसला चीनी ब्रांड्स के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पिछले साल तक भारत में CCTV बाजार के लगभग एक-तिहाई हिस्से पर इन कंपनियों का कब्जा था. हालांकि अब स्थिति तेजी से बदली है और घरेलू कंपनियों ने बाजार में मजबूत पकड़ बना ली है.
भारतीय कंपनियों का दबदबा बढ़ा
CP Plus, Qubo, Prama, Matrix और Sparsh जैसे भारतीय ब्रांड्स ने आक्रामक विस्तार किया है. इन कंपनियों ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव कर चीनी पुर्जों की जगह ताइवानी चिपसेट अपनाए हैं और सॉफ्टवेयर को स्थानीय स्तर पर विकसित किया है.
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, फरवरी तक भारतीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जबकि प्रीमियम सेगमेंट में अभी भी Bosch और Honeywell जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां मजबूत बनी हुई हैं.
Hero Group की कंपनी Qubo ने इस सरकारी कदम का स्वागत किया है. Qubo के संस्थापक निखिल राजपाल ने कहा कि यह फैसला राष्ट्रीय और व्यक्तिगत सुरक्षा को मजबूत करेगा और भारतीय विनिर्माण को बढ़ावा देगा.
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क्या हैं नए नियम?
ये बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा अप्रैल 2024 में लागू किए गए एसेंशियल रिक्वायरमेंट्स (ER) मानकों के तहत किए गए हैं. नियमों के अनुसार, कंपनियों को चिपसेट जैसे अहम पुर्जों के देश की जानकारी देनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि उपकरणों में दूरस्थ अनधिकृत पहुंच का कोई खतरा न हो. कंपनियों को इन नियमों के पालन के लिए दो साल का समय दिया गया था. अब तक 500 से अधिक CCTV मॉडल नए मानकों के तहत प्रमाणित किए जा चुके हैं.
सुरक्षा चिंताओं के चलते चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध
हाल के वर्षों में, सरकार ने प्रमुख क्षेत्रों में चीनी प्रौद्योगिकी के उपयोग को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें टिकटॉक जैसे ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना और हुआवेई और जेडटीई जैसी कंपनियों के टेलीफोन उपकरणों पर रोक लगाना शामिल है. सुरक्षा एजेंसियों ने गुप्त 'बैकडोर' एक्सेस, विदेशी सर्वरों को डेटा भेजे जाने और रक्षा स्थलों और सरकारी भवनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे कैमरों के उपयोग जैसे जोखिमों पर चिंता जताई है.














