- यह समझौता केवल टैरिफ कट नहीं बल्कि सेवाएं, डिजिटल ट्रेड, मोबिलिटी, स्थिरता और उभरती तकनीक को भी शामिल करता है
- भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में 99 प्रतिशत से अधिक तरजीही प्रवेश मिलेगा जिससे निर्यात में भारी वृद्धि होगी
- समझौता मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा और ऑटोमोबाइल, कृषि, प्रोसेस्ड फूड सहित कई क्षेत्रों को लाभ पहुंचाएगा
India European Union FTA Importance: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए. यह समझौता वर्षों की बातचीत के बाद हुआ और हाल के इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी ग्लोबल मार्केट का द्वार खोलता है. इसे मदर ऑफ ऑल डील क्यों कहा जा रहा है और दुनिया भर में इस समझौते को लेकर क्यों चर्चा बनी हुई है, इसे यहां समझिए...
क्यों अहम है ये समझौता
समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में संयुक्त रूप से किया. दोनों पक्षों ने इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया. भारत विश्व का चौथा और और यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. ग्लोबल जीडीपी का लगभग 25% और विश्व व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा इन्हीं देशों से आता है.
समझौते के बाद अधिकारियों ने कहा, "यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक रणनीतिक साझेदारी है." उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता केवल टैरिफ कट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सर्विसेज, डिजिटल ट्रेड, मोबिलिटी, स्थिरता और उभरती टेक्नोलॉजी भी शामिल हैं.
FTA से भारत को क्या मिलेगा
इस समझौते का मुख्य आधार भारतीय निर्यातकों के लिए एक बहुत बड़े बाजार तक पहुंच है. व्यापार मूल्य के हिसाब से 99% से अधिक भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय संघ में तरजीही प्रवेश मिलेगा, जिससे 75 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 6.41 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के निर्यात में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है. खासकर लेबर प्रधान क्षेत्रों जैसे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण तथा हस्तशिल्प में भारी लाभ की उम्मीद है. इस समझौते के लागू होते ही लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर 10% तक का टैरिफ समाप्त कर दिया जाएगा.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत द्वारा अब तक किए गए सबसे महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स में से एक बताया. उन्होंने कहा, “यह भरोसेमंद, पारस्परिक रूप से लाभकारी और संतुलित साझेदारी सुनिश्चित करने के भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है. गुड्स के अलावा, यह सर्विसेज में भी हाई वैल्यू कमिटमेंट्स और स्किल्ड इंडियन प्रोफेशनल के लिए मोबिलिटी फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है.”
इस समझौते की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है. यूरोपीय संघ पहले से ही भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है. 2024-25 में, गुड्स का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.5 अरब अमेरिकी डॉलर) था, जबकि सर्विसेज का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.1 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया. दोनों पक्षों के नीति निर्माताओं का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इन आंकड़ों को और भी बढ़ा सकता है.
भारत के लिए, इस समझौते को "मेक इन इंडिया" पहल को एक बड़ा बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है. संवेदनशील ऑटोमोबाइल क्षेत्र में, कोटा-आधारित उदारीकरण पैकेज बनाया गया है. इससे यूरोपीय निर्माताओं को अपनी महंगी कारों को भारत लाने की अनुमति मिलेगी और साथ ही भविष्य में यूरोपीय संघ के बाजार में भारत में निर्मित वाहनों के लिए भी रास्ते खुलेंगे. इससे कंज्यूमर को अधिक विकल्पों और प्रतिस्पर्धा से लाभ होने की उम्मीद है, जबकि निर्माताओं को निर्यात के नए रास्ते दिखाई देंगे.
कृषि और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात को भी लाभ होने की संभावना है. चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल और सब्जियां तथा प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे ग्रामीण आय और कृषि उद्यमों को मजबूती मिलने की संभावना है. साथ ही, भारत ने डेयरी, अनाज, मुर्गी पालन और कुछ फलों और सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित कर लिया है, जिससे घरेलू प्राथमिकताओं और आजीविका की रक्षा सुनिश्चित हो सके.
सर्विसेज और तकनीक में होने वाले फायदे
टैरिफ के अलावा, यह समझौता बेहतर रेगुलेटरी सहयोग, सरल कस्टम प्रोसीजर और तकनीकी मानकों पर स्पष्ट नियमों के माध्यम से लंबे समय से चली आ रही गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करता है. इसमें यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) पर संवाद, तकनीकी सहयोग और समर्थन का प्रावधान है. इसे यूरोपीय संघ के देश बहुत तरजीह देते हैं और अक्सर ये निर्यात में विवाद का विषय बनता है.
सर्विसेज-दोनों अर्थव्यवस्थाओं का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा है. इस समझौते में यूरोपीय संघ ने आईटी और आईटी सक्षम सर्विसेज, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा, फाइनेंस, पर्यटन और निर्माण सहित 144 सब सेक्टर्स में प्रतिबद्धताएं जताई हैं. बदले में, भारत ने 102 सब सेक्टर्स को खोला है. यह समझौता बिजनेस विजिटर्स, इंट्रा कॉर्पोरेट ट्रांसफेरिज और कई क्षेत्रों में कॉन्ट्रैक्ट सर्विस सप्लायर्स और स्वतंत्र पेशेवरों को शामिल करते हुए, आवागमन के लिए एक सुगम ढांचा भी प्रदान करता है. इसमें आश्रितों के लिए भी प्रावधान है. सामाजिक सुरक्षा समझौतों के लिए एक ढांचा है और छात्र आवागमन और अध्ययन के बाद के कार्य के लिए समर्थन किया गया है. भारतीय पारंपरिक चिकित्सा के चिकित्सकों को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में अपने घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी.
फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में, यह समझौता इनोवेशन और सीमा पार डिजिटल भुगतान पर सहयोग को बढ़ावा देता है. साथ ही प्रमुख यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाओं में बाजार पहुंच को मजबूत करता है. यह समझौता TRIPS के अनुरूप इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन को भी मजबूत करता है. पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय के महत्व को मान्यता देता है, और एआई, क्लीन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग के द्वार खोलता है.
अधिकारियों का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भविष्य के लिए तैयार किया गया है, जिसमें तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव और नियामक जटिलताओं से निपटने के लिए समीक्षा और परामर्श तंत्र हैं. भारत के लिए, यह 22वां मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है.
सुरक्षित दुनिया का भरोसा
आंकड़ों से परे, इस समझौते को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में दो समान विचारधारा वाले साझेदारों के बीच रणनीतिक विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है. भारत के "विकसित भारत 2047" के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने का वादा करता है, बल्कि रोजगार सृजन, लघु एवं मध्यम उद्यमों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने और नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच अधिक मजबूत, समावेशी और भविष्योन्मुखी साझेदारी को मजबूत करने का भी वादा करता है.
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