भारत ने कैसे लिया पहलगाम का बदला, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ही नहीं ये मार भी रही भरपूर

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर से नहीं, बल्कि कूटनीतिक‑आर्थिक मोर्चों पर भी जवाब दिया. सिंधु जल संधि को अबेयन्स में रखा, व्यापार‑वीज़ा रोके, अटारी‑वाघा बॉर्डर सील किया, हवाई क्षेत्र सख्त किया और सांस्कृतिक प्रतिबंध लगाए.

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पहलगाम हमले की पहली बरसी
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  • पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया.
  • भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है.
  • भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को रोकते हुए आर्थिक नाकेबंदी लागू की.
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नई दिल्ली:

22 अप्रैल 2025 को जम्मू‑कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रही. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जहां आतंकी ढांचों पर सटीक वार हुआ, वहीं भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ बहुआयामी दबाव रणनीति अपनाई. पानी, व्यापार, वीजा, संस्कृति, सीमा और आसमान तक भारत ने जोरदार वार किया. 

ऑपरेशन सिंदूर: सटीक सैन्य संदेश

7-10 मई 2025 के बीच चला ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले के जवाब में भारत की अब तक की सबसे व्यापक, त्रि‑सेवा समन्वित कार्रवाई रही है. भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल, ड्रोन और स्टैंड‑ऑफ हथियारों से हमले किए गए. भारत ने दावा किया कि नागरिक परिसरों से बचते हुए आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. चार दिन की झड़पों के बाद 10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO को फोन किया और सीजफायर पर सहमति बनी.

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सिंधु जल संधि ‘अबेयन्स' में 

पहलगाम के तुरंत बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को अबेयन्स (निलंबन) में रखने का फैसला किया. भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा‑पार आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. भारत के इस सख्त एक्शन ने द्विपक्षीय संबंधों में बड़ा मोड़ दिखाया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस छेड़ी. पर पहलगाम हमले के बाद से भारत का रुख स्पष्ट था कि कहा कि दोनों देशों के बीच कोई भी संधि आतंकी समर्थन खत्म होने पर ही संभव है. 

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आर्थिक नाकेबंदी 

हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को रोकने का फैसला लिया. इसमें प्याज जैसे जरूरी सामान के निर्यात पर रोक, और सीमेंट व टेक्सटाइल जैसे आयात पर प्रतिबंध शामिल हैं. इस कदम का सीधा असर पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जो पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रही है। भारत का यह कदम साफ करता है कि अब आर्थिक मोर्चे पर भी सख्ती बरती जाएगी।

सांस्कृतिक व वीजा प्रतिबंध 

भारत ने ‘पीपल-टू-पीपल' कनेक्शन को भी पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कदम उठाया. पाकिस्तानी कलाकारों और एक्टर्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, वहीं भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई. मेडिकल और धार्मिक आधार पर मिलने वाले वीजा भी निलंबित कर दिए गए हैं. यह कदम प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन इसका असर दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों पर गहरा पड़ेगा.

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अटारी‑वाघा बॉर्डर: पूरी तरह सील

राजनयिक निर्णयों के हिस्से के रूप में अटारी‑वाघा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बंद की गई. पहले यहां सीमित व्यापार, करतारपुर कॉरिडोर जैसी आवाजाही और कुछ मानवीय छूट दी जाती थी, लेकिन अब हर तरह की गतिविधि पर रोक लगा दी गई है. यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से अहम है और यह दर्शाता है कि भारत अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है.

हवाई क्षेत्र पर सख्ती 

भारत ने पाकिस्तान के लिए अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को और सीमित कर दिया है. पहले ही दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बंद थीं, लेकिन अब एयरस्पेस पर सख्ती बढ़ाकर भारत ने पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को महंगा और जटिल बना दिया है. इससे न सिर्फ उसकी एविएशन इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक कनेक्टिविटी भी प्रभावित होगी.

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विश्लेषकों के मुताबिक, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि उसका जवाब केवल सैन्य नहीं, समग्र होगा. जहां हर दबाव‑बिंदु एक साथ सक्रिय किया जाएगा. पानी, पैसा, पासपोर्ट, परफॉर्मेंस (संस्कृति), प्वाइंट‑ऑफ‑एंट्री और प्लेन. हर मोर्चे पर संदेश एक ही है कि आतंक के समर्थक पाक को इस हमले की कड़ी कीमत चुकानी होगी. ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य प्रतिरोध की लकीर खींची, और उसके साथ चले कूटनीतिक‑आर्थिक फैसलों ने उस लकीर को गहरा किया.  

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