आखिर अचानक क्यों बदल गया मौसम? 1000 किमी लंबे इस दुर्लभ सिस्टम ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया

अफगानिस्तान से भारत तक 1000 किमी लंबी बादलों की दुर्लभ 'सीधी रेखा' खिंच गई है, जिसने भीषण गर्मी के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदल दिया है. अगले कुछ दिन बारिश का दौर जारी रहेगा.

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  • दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में पिछले दो-तीन दिनों से बारिश का दौर जारी है, जिससे गर्मी से राहत मिली है
  • दिल्ली में मार्च के महीने में हुई बारिश ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ा है और पारा सात डिग्री तक गिरा है
  • वर्तमान बारिश का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है जो उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय है और तेज हवाएं भी चला रहा है
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दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिली है. पिछले दो तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है. दिल्ली में तो बारिश ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बेमौसम बारिश से ठंड की वापसी भी हुई है. पारा 7 डिग्री तक गिर गया है. अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट है. मार्च के महीने में आखिर में बारिश होना सामान्य बात नहीं है. हाल के दिनों में मौसम के पैटर्न काफी अप्रत्याशित हो गए हैं और यह घटना पूरे भारत में बदलते जलवायु पैटर्न का एक बड़ा संकेत भी है. आखिर क्यों अचानक मौसम इतना अनिश्चित हो गया है? आइये इसे विस्तार से समझते हैं.

क्या है इस बदलाव की वजह?

फिलहाल दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में हो रही बारिश का मुख्य कारण एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है. यह ऊपरी हवा का एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन है जो फिलहाल उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है. इस सिस्टम के कारण न केवल बारिश हो रही है, बल्कि 40-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं.कई राज्यों में ओले भी गिरे हैं. वहीं हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी भी हो रही है.

सामान्य पश्चिमी विक्षोभ से कैसे है अलग?

आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों के महीने यानी दिसंबर-फरवरी में आते हैं, जो भूमध्य सागर से उठते हैं और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए बर्फबारी और शीत लहर लाते हैं. लेकिन इस बार का सिस्टम खास है. यह एक सीधी ट्रफ के रूप में है, जिसने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ऊपर करीब 1,000 किमी लंबी बारिश की पट्टी बना दी है. मार्च के अंत में जेट स्ट्रीम कमजोर होकर उत्तर की ओर खिसक जाती है, जिससे ऐसे सिस्टम दुर्लभ हो जाते हैं. लेकिन इस बार यह काफी सक्रिय है.

कहां से आ रही है इतनी नमी?

इस सिस्टम को नमी समुद्रों से मिल रही है. इसके मुख्य स्रोत भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, काला सागर और फारस की खाड़ी है. जब यह सिस्टम भारत की ओर बढ़ता है, तो अरब सागर से उठने वाली नमी इसे और अधिक शक्तिशाली बना देती है.

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मौसम विभाग ने आज दिल्ली-एनसीआर में बारिश का अलर्ट जारी किया है. आईएमसी के अनुसार, आज दिनभर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ छींटें पड़ने की संभावना है. वहीं अधिकतम तापमान 25-28°C के बीच रहेगा, जो सामान्य से काफी कम है. अगले दो दिन भी बारिश का दौर जारी रहेगा. इसके बाद 22 मार्च से एक और हल्का पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है.

क्या यह 'न्यू नॉर्मल' है?

जलवायु के हिसाब से भारत में दिसंबर से फरवरी के दौरान हर महीने 4-6 तेज पश्चिमी विक्षोभ आते हैं. मार्च के आखिर तक यह गतिविधि काफी कम हो जाती है, क्योंकि जेट स्ट्रीम कमजोर पड़ जाती है और उत्तर की ओर खिसक जाती है. इस वजह से बड़े सिस्टम कम ही बनते हैं. लेकिन हाल के सालों में पश्चिमी विक्षोभ के सीजन की अवधि बढ़ रही है. पहले जो सिस्टम फरवरी तक खत्म हो जाते थे, वे अब अप्रैल तक सक्रिय देखे जा रहे हैं. यह ग्लोबल वार्मिंग और सबट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम के देरी से पीछे हटने का परिणाम हो सकता है.

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