- जस्टिस विक्रम नाथ ने आवारा कुत्तों के मामले से विश्व सिविल सोसाइटी में पहचान हासिल की है.
- जस्टिस नाथ 2027 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में वर्तमान में दूसरे स्थान पर हैं.
- उन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर नालसा की क्षेत्रीय सम्मेलन में अपनी बात रखी.
अदालत के भीतर और इसके बाहर अपने हल्के फुल्के अंदाज़ के लिए मशहूर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस विक्रम नाथ ने शनिवार को कहा "आवारा कुत्ते" मामले ने उन्हें दुनिया भर की सिविल सोसाइटी में प्रसिद्ध कर दिया है. जस्टिस नाथ 2027 में जस्टिस सूर्य कांत के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI बनने की कतार में हैं.
छोटे-मोटे काम के लिए जाना जाता था
जस्टिस नाथ ने केरल के तिरुवनंतपुरम में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (नालसा) की अगुवाई में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि वह इस मामले को उन्हें सौंपने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के आभारी हैं. लंबे समय से कानूनी बिरादरी में मुझे मेरे छोटे-मोटे काम के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन मैं आवारा कुत्तों का भी आभारी हूं, जिन्होंने मुझे न केवल इस देश में, बल्कि दुनिया भर में पूरी सिविल सोसाइटी में पहचान दिलाई और मैं अपने मुख्य न्यायाधीश का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह मामला सौंपा.
मुझे उनकी भी शुभकामनाएं प्राप्त
वरिष्ठ जज जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हाल ही में, हम 'लॉ एशिया पोला समिट' में थे. वकीलों की एसोसिएशन के अध्यक्ष वहां थे. इसलिए उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले पर सवाल पूछना शुरू कर दिया.. मुझे बहुत खुशी हुई... - खैर, भारत के बाहर के लोग भी मुझे जानते हैं. इसलिए मुझे यह पहचान देने के लिए मैं उनका आभारी हूं और मुझे संदेश भी मिल रहे हैं कि कुत्ते प्रेमियों के अलावा, कुत्ते भी मुझे आशीर्वाद और शुभकामनाएं दे रहे हैं. मानवीय आशीर्वाद और शुभकामनाओं के अलावा, मुझे उनकी भी शुभकामनाएं प्राप्त हैं.
कुत्तों का कौन सा था मामला
दरअसल, जस्टिस विक्रम नाथ तीन जजों वाली पीठ की अगुवाई कर रहे थे, जिसने 22 अगस्त को दो जजों वाली पीठ के 11 अगस्त के निर्देश पर रोक लगा दी थी कि दिल्ली-NCR से उठाए गए आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टरों से नहीं छोड़ा जाना चाहिए. जस्टिस नाथ की पीठ ने आदेश दिया कि आवारा कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद वापस उसी जगह छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया जाएगा.