- शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में शामिल होने के लिए पीएम मोदी 2018 के बाद पहली बार चीन पहुंचे हैं
- भारत-चीन के बीच कूटनीतिक संबंध 1950 में स्थापित हुए, लेकिन 1962 के सीमा संघर्ष ने रिश्तों को प्रभावित किया
- 2003 से दोनों देशों ने सीमा विवाद पर विशेष तंत्र स्थापित कर द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के प्रयास तेज किए
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंच गए. पीएम मोदी 2018 के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर गए हैं. दो दिन की इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को फिर से स्थापित करने के रूप में देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री रविवार को सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे.
पीएम मोदी का चीन पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया
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1950 से भारत-चीन कूटनीतिक संबंध
भारत और चीन के बीच 1 अप्रैल 1950 को कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे. भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता देने वाला पहला गैर साम्यवादी देश बना. हालांकि 1962 के सीमा संघर्ष के बाद रिश्तों पर गहरा असर पड़ा. 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा से इन संबंधों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई.
द्विपक्षीय संबंधों में मील के पत्थर
- 2003 में पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने यात्रा की और सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र की स्थापना हुई.
- 2005 में चीनी प्रधानमंत्री वेन जीआबाओ भारत यात्रा पर आए, जो सामरिक व सहयोगात्मक साझेदारी की शुरुआत थी
- 2014 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया, यह यात्रा कई मायनों में खास रही.
- 2015 में पीएम मोदी चीन यात्रा पर गए. 2018 और 2019 में वुहान और चेन्नई में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुए.
लद्दाख सीमा विवाद से बढ़ा तनाव
साल 2020 में लद्दाख सीमा विवाद गहराने पर रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे. हालांकि हाल के प्रयासों खासकर 2024 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच सकारात्मक बैठक से रिश्तों में फिर से सुधार की उम्मीद नजर आई.
विदेश मंत्रियों की कई बार मुलाकात
विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच भी कई बार मुलाकात हो चुकी है. हाल ही में 2025 में एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद वांग यी ने 24वीं विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमा वार्ता के लिए भारत का दौरा किया.
दोनों देशों के बीच ये बैठकें संवाद, विश्वास बहाली और स्थिरता लाने के प्रयासों को दिखाती हैं. इन मल्टी-ट्रैक संवादों ने सीमा पर वास्तविक नियंत्रण (एलएसी) के आसपास तनाव बढ़ने से बचने और पारदर्शिता लाने मदद की है.