- चुनाव आयोग पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव की तारीख जल्द घोषित करेगा
- पश्चिम बंगाल में पिछली बार आठ चरणों में मतदान हुआ था, इस बार दो या तीन चरणों की संभावना है
- राजनीतिक दलों का मानना है कि कम चरणों में मतदान से चुनाव खर्च और प्रचार का समय कम होगा
चुनाव आयोग पांच राज्यों में चुनाव की तारीख की घोषणा करने जा रहा है और ये राज्य हैं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी मगर सबकी दिलचस्पी इस बात में है कि इस बार पश्चिम बंगाल में कितने चरणों या फेज में चुनाव होगा? पिछली बार पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान हुआ था और करीब एक महीने तक वोटिंग हुई थी. पश्चिम बंगाल में जहां पहला चरण 27 मार्च को शुरू हुआ था वहीं आठवां और आखिरी चरण 29 अप्रैल को खत्म हुआ था.
सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर हैं कि इस बार आयोग कितने चरण में मतदान कराता है. इस संबंध में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के अपने दो दिनों के दौरे में राजनैतिक दलों से विचार विमर्श किया है. अधिकतर पार्टियों के नेताओं का मानना है कि चुनाव आयोग को इस बार दो फेज या अधिक से अधिक तीन फेज में चुनाव करवा लेनी चाहिए. जैसे बिहार में भी पहले तीन चरणों में मतदान होता था मगर इस बार केवल दो ही चरणों में मतदान कराया गया.
राजनीतिक पार्टियों ने बताई दिक्कतें
राजनैतिक दलों के नेताओं का कहना है अधिक चरण में मतदान का मतलब है प्रचार का लंबा खिसकना जिसमें पैसे से लेकर परिश्रम भी ज्यादा लगता है. एक तरफ जहां चुनाव खर्चीला हो जाता तो दूसरी तरफ चुनाव ऊबाउ हो जाता है. मगर इसका एक पहलू है कि अधिक चरण में मतदान होने पर राजनैतिक दल अपने संसाधनों का उपयोग बार बार करते हैं इसमें बाहुबल से लेकर अन्य संसाधन भी हैं. पश्चिम बंगाल के नेताओं का मानना है कि इस बार आठ चरणों के बजाए दो चरण में ही मतदान हो तो ज्यादा अच्छा होगा. जहां तक सुरक्षा व्यवस्था की बात है तो पश्चिम बंगाल में पहले से पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बल मौजूद हैं.
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इस बार कम चरणों में होंगे चुनाव?
वैसे पिछली बार भी असम और पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में वोटिंग हुई थी. असम में भी पिछली बार तीन चरणों में मतदान हुआ था, यहां भी मतदान दो ही चरणों में कराए जाने की मांग है.
चुनाव आयोग को बाकी राज्यों में एक चरण में मतदान कराने में कोई दिक्कत नहीं होती है मगर बिहार, पश्चिम बंगाल या उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जो पहले चुनावी हिंसा के लिए बदनाम होते थे वहां भी अब एक भी हिंसा की खबर नहीं आती है. पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी बूथ पर दोबारा मतदान की नौबत ही नहीं आई. उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में भी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से होगा और कम चरणों में कराया जाएगा.
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