ट्रेन की चादरों की कैसे होती है धुलाई, देखिए जरा

बैडरोल और कंबलों के रखरखाव और सफाई के बारे में उत्तर रेलवे के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि यह लॉन्ड्री 2017-18 में शुरू हुई थी. आनंद विहार टर्मिनल को लगभग 17500 लिनेन सेट की आपूर्ति की जाती है.

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नई दिल्ली:

आनंद विहार रेलवे स्टेशन से एक वीडियो सामने आया है. जिसमें दिखाया गया है कि ट्रेनों में यात्रियों को दिए जाने वाले वाले बैडरोल की धुलाई कैसे की जाती है. पहले वॉशिंग मशीन में बैडरोल (चादरों और तकिये के कवर) को अच्छे से धोया जाता है. फिर उनको मशीन की मदद से ही सुखाया जाता है. इसके बाद अच्छे से प्रेस करके इनको पैक किया जाता है. इस तरह से एकदम साफ बैडरोल यात्रियों तक पहुंचाई जाती है. चादर की सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है.  

बैडरोल और कंबलों के रखरखाव और सफाई के बारे में उत्तर रेलवे के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि यह लॉन्ड्री 2017-18 में शुरू हुई थी. यह पूरी तरह से मशीनीकृत लॉन्ड्री है. आनंद विहार टर्मिनल को लगभग 17500 लिनेन सेट की आपूर्ति की जाती है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इस लॉन्ड्री सुविधा से जाता है. लिनेन की सफाई एक उचित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है. धुले हुए लिनन को उच्च तापमान पर मशीनीकृत स्टीमर में इस्त्री किया जाता है. कंबलों को भी अच्छे से साफ किया जाता है.

नया लांड्री केयर सेंटर स्थापित

इसी बीच पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने सभी यात्रियों को स्वच्छ और अच्छी गुणवत्ता वाले लिनेन उपलब्ध कराने के लिए गुवाहाटी में एक नया लांड्री केयर सेंटर स्थापित किया है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 32,000 बेडरोल की है.

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इससे पहले उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने कहा था कि सभी चद्दरों और पिलो कवर की मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में धुलाई और इस्त्री की जाती है ताकि यात्रियों को स्वच्छ बैडरोल मिल सके. उन्होंने ये भी बताया था कि कंबलों की धुलाई 2010 में जहां तीन महीने में एक बार की जाती थी, उस अवधि को घटा कर 2010 से दो महीने में एक बार तथा वर्तमान में 30 दिन में एक बार किया गया था.

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