- आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा की जगह पर अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता नियुक्त किया है.
- मित्तल पंजाब के उद्योगपति और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, जो अपनी विनम्रता के लिए जाने जाते हैं.
- मित्तल ने कहा कि उन्हें उपनेता बनाए जाने की जानकारी अचानक मिली और राघव चड्ढा ने सबसे पहले बधाई दी.
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने सांसद अशोक मित्तल को सदन में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया है. उन्हें यह जिम्मेदारी अब तक उपनेता रहे राघव चड्ढा को हटाकर सौंपी गई है, जिससे सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई है और अटकलों का बाजार भी गर्म हो गया है. इस फैसले के बाद अशोक मित्तल ने उपनेता बनने की कहानी बताई है. साथ ही राघव चड्ढा को लेकर विवाद से भी दूरी बनाने की कोशिश की है.
पंजाब के जाने‑माने उद्योगपति और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल शिक्षा, ऑटोमोबाइल और मिठाई उद्योग से जुड़े रहे हैं. 61 साल के मित्तल को अपनी विनम्रता और सादगी के लिए जाना जाता है. गुरुवार को जब मीडिया ने उनसे उपनेता बनाए जाने और राघव चड्ढा को लेकर प्रतिक्रिया चाही गई तो उन्होंने किसी भी तरह के विवाद से दूरी बना ली. हंसते हुए मीडिया से कहा कि मुझे विवादों में मत फंसाओ मैं राघव जी के मुद्दे पर बात नहीं करना चाहता हूं.
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संजय सिंह ने बताया, अब आप होंगे उपनेता: मित्तल
अशोक मित्तल ने राज्यसभा में पार्टी के उपनेता बनने को लेकर जरूर पूरी कहानी बताई. मित्तल ने बताया कि उन्हें खुद दोपहर 12 बजे यह पता नहीं था कि पार्टी उनको राज्यसभा में उपनेता बना रही है. उन्होंने बताया कि कल जब वो ग्रीन कवर पर सेप्लीमेंट्री सवाल पूछने की तैयारी कर रहे थे, तभी राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपने पास बुलाया और कहा कि मैंने राज्यसभा सचिवालय में पत्र दे दिया है, अब आप उपनेता होंगे.
राघव चड्ढा ने दी सबसे पहले बधाई: मित्तल
मित्तल ने बताया कि मैं कुछ समझता इससे पहले फिर उन्होंने कहा कि अब राघव चड्ढा की जगह पर आप उपनेता होंगे. ये बड़ा फैसला है. पार्टी ने मेरे ऊपर भरोसा दिखाया है. उन्होंने बताया कि जब सवाल पूछकर बाहर निकला तो करीब एक बजे के आसपास बधाई देने वालों में सबसे पहले राघव चड्ढा ही थे. बाहर निकल कर उन्होंने मुझसे हाथ मिलाते बधाई दी.
2022 में राज्यसभा सांसद बनने वाले अशोक मित्तल अब भी राघव चड्डा के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं. मित्तल चूंकि अब तक परंपरागत राजनीति में नहीं रहे हैं, ऐसे में फिलहाल उनके बयानों के तरकश में तीखे सवालों की जगह विनम्रता है. हालांकि अगर पार्टी को सत्ता पक्ष को घेरना है तो कम से कम संजय सिंह जैसे तेवर उन्हें भी लाने होंगे.














