हिमाचल के सवा दो लाख कर्मचारियों का DA बकाया, हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस; 4 हफ्ते में मांगा जवाब

अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर कर्मचारियों का हक क्यों रोका गया? जहां केंद्र 60% डीए दे रहा है, वहीं हिमाचल के कर्मचारी 45% पर ही क्यों अटके हैं? पढ़ें विद्या दत्त शर्मा की यह रिपोर्ट.

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हिमाचल DA पर हाईकोर्ट सख्त: 2.25 लाख कर्मचारियों का हक रोकने पर सरकार को नोटिस

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है. केंद्र सरकार की तुलना में कम DA मिलने और समय पर भुगतान न होने के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया है.

अदालत का नोटिस और 4 हफ्ते का समय

जस्टिस जियालाल भारद्वाज की बेंच ने कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करे. इस मामले की अगली सुनवाई 4 जून को तय की गई है.

कर्मचारियों ने दिए ये तर्क

याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने दलील दी है कि वर्तमान में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी ही भुगतान किया जा रहा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार केंद्र की तुलना में 15 फीसदी कम डीए दे रही है. तर्क दिया गया है कि महंगाई भत्ता वेतन का अभिन्न हिस्सा है, जिसे महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है, लेकिन सरकार इसे रोककर बैठी है.

केंद्र या पंजाब पैटर्न?

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि हिमाचल प्रदेश का अपना कोई वेतन आयोग नहीं है. राज्य आमतौर पर पंजाब पैटर्न या केंद्र सरकार के फार्मूले का पालन करता है. ऐसे में कर्मचारियों ने मांग की है कि 1 जुलाई 2024 से रुकी हुई डीए की सभी किस्तों को केंद्र की तर्ज पर तुरंत जारी किया जाए. इसी तरह के एक अन्य मामले (भूपेंद्र बनाम राज्य सरकार) में भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया है, जिसकी सुनवाई 28 मई को होनी है.

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सवा दो लाख कर्मचारियों की नजरें कोर्ट पर

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में 2 लाख 25 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं. कर्मचारियों का न केवल डीए, बल्कि भारी-भरकम एरियर भी सरकार की ओर बकाया है. कर्मचारी संघ कई बार सड़कों पर उतरकर इसकी मांग कर चुके हैं, लेकिन आर्थिक तंगी का हवाला देकर अब तक भुगतान नहीं हुआ है. अब हाईकोर्ट के दखल के बाद प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को न्याय की उम्मीद जगी है.

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