दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश ने गर्मी से दी राहत, मॉनसून के लिए इन राज्यों को अभी करना होगा इंतजार

सोमवार को मौसम विभाग ने कहा कि 1 जून से 29 जून के बीच देश में औसत से 42% कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है. आमतौर पर 01 जून से 29 जून के बीच देश में औसतन 157.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल जून महीने में 29 तारीख तक सिर्फ 92.2 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गयी है.

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अचानक हुई बारिश ने हर इंसान को खुश कर दिया.
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  • नोएडा में हुई अचानक बारिश ने गर्मी से राहत दी, लेकिन मॉनसून के पहुंचने में अभी देरी रहेगी
  • अगले दो दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ेगा
  • जून महीने में देशभर में औसतन 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है, खासकर मध्य भारत में 54 प्रतिशत कमी दर्ज हुई

दिल्ली-एनसीआर में आज अचानक झमाझम बारिश ने गर्मी से लोगों को राहत दी. हालांकि, अभी मॉनसून के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. सोमवार को जारी अपने ताजा पूर्वानुमान रिपोर्ट में भारत मौसम विभाग ने कहा कि अगले 2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों, और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. इसके बाद के 2-3 दिनों में यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्व राजस्थान और गुजरात के बाकी हिस्सों में भी आगे बढ़ेगा.

ये बारिश मॉनसून वाली नहीं

अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. भारत मौसम विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है. जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है.

कहां कब पहुंचेगा मॉनसून

फिलहाल 29 जून को सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, और 29 जून तथा 2 और 3 जुलाई को कोंकण और गोवा में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश होने की संभावना है. मध्य महाराष्ट्र में 2 और 3 जुलाई को ऐसी बारिश हो सकती है. पिछले कुछ दिनों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी चल रही है. इसकी वजह से अब तक मॉनसून की बारिश में कमी देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड की गयी है.

सोमवार को मौसम विभाग ने कहा कि 1 जून से 29 जून के बीच देश में औसत से 42% कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है. आमतौर पर 01 जून से 29 जून के बीच देश में औसतन 157.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल जून महीने में 29 तारीख तक सिर्फ 92.2 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गयी है. सबसे ज्यादा deficiency सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में दर्ज़ की गयी है, जहां 01 जून से 29 जून के बीच औसत से 54% कम बारिश दर्ज की गयी है.

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दूसरी सबसे ज्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी जा रही है, जहां इन 29 दिनों के दौरान औसत से 41% कम बारिश हुई है. इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 28% रही है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी बढ़कर 30% हो गयी है.

उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, "हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी "जी राम जी" कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा.  

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कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मानसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नयी वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए "जी राम जी" कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके.

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