गंगा जी में देसी जुगाड़ के जरिए पेट पालते हैं ये लोग, बर्फीले पानी में घंटों तक बिना थके करते हैं काम

हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर ऐसे कई लोग मिल जाते हैं जो सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक पानी में उतरकर दान की गई वस्तुएं निकालते हैं. मौसम चाहे कड़ाके की ठंड का हो, भीषण गर्मी का या बारिश का, इन लोगों का काम कभी नहीं रुकता है.

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  • हरिद्वार के हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर कुछ लोग गंगा में दान वस्तुएं निकालकर रोजी-रोटी चलाते हैं.
  • ये लोग सुबह छह बजे से शाम आठ बजे तक मौसम की परवाह किए बिना गंगा में डुबकी लगाकर सामान खोजते हैं.
  • वे प्लास्टिक बाल्टी, PVC पाइप और चुंबक से बनाए देसी उपकरणों से सिक्के, सोना-चांदी और बर्तन निकालते हैं.
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हरिद्वार में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार है. गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है, जहां डुबकी लगाने से पाप धुलते हैं और लोगों को आत्मिक शांति मिलती है. हालांकि गंगा के किनारे एक और दुनिया भी बसती है, जो गंगा में दान किए गए सिक्कों, सोने‑चांदी और तांबे‑स्टील के बर्तनों को निकालकर अपनी रोजी‑रोटी चलाती है. 

हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर ऐसे कई लोग मिल जाते हैं जो सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक पानी में उतरकर दान की गई वस्तुएं निकालते हैं. मौसम चाहे कड़ाके की ठंड का हो, भीषण गर्मी का या बारिश का, इन लोगों का काम कभी नहीं रुकता है. ये लोग गंगा में डुबकी लगाकर घंटों तक पानी में रहते हैं और देसी जुगाड़ से दान की गई वस्तुएं खोजते हैं. 

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खुद के उपकरण से खोजते हैं सोना-चांदी

इनकी सबसे बड़ी ताकत खुद के बनाए उपकरण हैं. कोई दो‑तीन प्लास्टिक बाल्टियों को जोड़कर नीचे कांच लगाता है और उसी से पानी के भीतर झांककर सामान खोजता है, कोई पीवीसी पाइप के नीचे कांच लगाकर उसे पानी में डुबोकर सिक्के या गहने तलाशता है. कुछ लोग रस्सी के आगे चुंबक बांधकर दान किए गए सिक्के निकालते हैं. वहीं कुछ कुशल तैराक प्रोफेशनल स्विमिंग गॉगल्स लगाकर 15–20 सेकंड तक पानी में गोता लगाकर गंगा के तले में जमा सामान तलाशते हैं. 

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रोजाना 150 से 200 रुपये की कमाई

अनूप बताते हैं कि वे PVC पाइप का इस्तेमाल कर रोज 150–200 रुपये कमा लेते हैं. पर्व या बड़े स्नान के दिनों में उनकी कमाई बढ़ जाती है. मंगल कुमार कहते हैं कि गंगा भले ठंडी हो, लेकिन गंगा मैया भूखा नहीं रहने देती है, उन्हें कभी‑कभी सोना‑चांदी मिलने पर कमाई 300 रुपये से ऊपर भी चली जाती है. 

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राज चुंबक की मदद से सिक्के निकालते हैं और बताते हैं कि वे कभी 150 तो कभी 200 रुपये तक कमा लेते हैं. करीब दो घंटे तक पानी में रहकर के सिक्‍के निकाले जाते हैं. ठंड से बचने के लिए घंटों पानी में रहने के बाद आग के पास बैठना पड़ता है. 

दान की वस्‍तुएं ढूंढकर पालते हैं परिवार का पेट 

डब्लू और उनके साथी प्रोफेशनल स्विमर की तरह गोता लगाकर दान की हुई थाली, लोटा, सिक्के और गहने तक तलाश लेते हैं. अनूप, मंगल, राज और डब्लू जैसे सैकड़ों लोग गंगा में उतरकर श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई वस्तुएं खोजकर अपने परिवार का पेट भरते हैं. उनकी रोजी‑रोटी उन करोड़ों लोगों पर टिकी है जो आस्था के साथ गंगा में अर्पण करते हैं. 
 

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