फेल होने के डर से नहीं छूटेगी पढ़ाई, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सरकार नई योजना लाई

PLFS की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 14-18 साल के करीब 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. देश में हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र बोर्ड परीक्षाओं में फेल हो रहे हैं, जिससे बीच में ही स्कूल छोड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है.

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  • केंद्र सरकार स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की जिला स्तर पर पहचान करके उन्हें स्कूल भेजने की योजना ला रही है
  • रिपोर्ट के अनुसार 14-18 वर्ष के 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जाते. हर साल 50 लाख बच्चे बोर्ड में फेल हो रहे हैं
  • इन बच्चों को परीक्षा पास करने के ज्यादा मौके मिलेंगे, ऑन डिमांड परीक्षा का भी विकल्प दिया जाएगा
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बोर्ड परीक्षाओं में फेल होकर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों और स्कूल जाने से वंचित बच्चों के लिए केंद्र सरकार नई राष्ट्रीय पहल शुरू करने जा रही है. इसके तहत जिला स्तर पर स्कूल नहीं जा रहे बच्चों की पहचान की जाएगी और उनका स्कूल में दाखिला कराया जाएगा. इसके अलावा ओपन स्कूलों की मदद लेकर बच्चों को आसानी से परीक्षा पास करने में मदद की जाएगी. 

स्कूल नहीं जा रहे 2 करोड़ से ज्यादा बच्चे 

केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने यह कवायद Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2023-24 की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े देखने के बाद शुरू की है. केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 14 से 18 साल के करीब 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, कक्षा 3 से 8 के 11% बच्चे भी स्कूल से बाहर हैं. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि देश में हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र बोर्ड परीक्षाओं में फेल हो रहे हैं, जिससे बीच में ही स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है. देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए यह रिपोर्ट एक अलार्म की तरह है. 

NIOS की मदद से चलेगा अभियान

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) अब बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले करोड़ों बच्चों की पहचान करके उन्हें फिर से स्कूल भेजने की पहल शुरू करने जा रहा है. इसमें राज्यों की भी मदद ली जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्य के लिए ओपन स्कूलों और राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (NIOS) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी. 

ऑन डिमांड परीक्षा, ज्यादा मौके मिलेंगे

एनआईओएस इन छात्रों को दाखिलों में लचीलापन प्रदान करेगा, यानी सख्त शर्तें नहीं रखी जाएंगी. इन्हें परीक्षा पास करने के ज्यादा मौके दिए जाएंगे. ऑन डिमांड परीक्षा का भी विकल्प मिलेगा ताकि वो अपनी सुविधानुसार पढ़ाई कर सकेंगे. इसके अलावा वोकेशनल सर्टिफिकेशन कोर्स भी कराए जाएंगे, जिनकी मान्यता अन्य बोर्ड के बराबर होगी. 

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वंचित और हाशिए पर रहने वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए मंत्रालय ‘NIOS मित्र' कार्यक्रम शुरू कर रहा है. इसके तहत जिला स्तर पर सर्वे करके ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की जाएगी.  ये 'मित्र' न सिर्फ बच्चों को गाइडेंस देंगे बल्कि उनके नामांकन से लेकर पढ़ाई में मार्गदर्शन तक हर कदम पर मदद करेंगे. इस दौरान आदिवासी, प्रवासी, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

KVS, नवोदय विद्यालयों में बनेंगे स्टडी सेंटर

इसके लिए मंत्रालय एनआईओएस केंद्रों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. फिलहाल एनआईओएस देश भर में लगभग 10,800 स्टडी और एग्जाम सेंटर संचालित करता है. सरकार की योजना हर ब्लॉक में कम से कम एक सेंटर बनाने की है. पीएम श्री स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूलों को भी NIOS स्टडी और परीक्षा केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. 

2030 तक 100% नामांकन का लक्ष्य 

दुनिया के सबसे बड़े मुक्त शिक्षा बोर्ड के रूप में एनआईओएस उन छात्रों को विकल्प देगा जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक बाधाओं की वजह से नियमित स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत साल 2030 तक प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत नामांकन (GER) हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया है.

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