- गंगासागर मेला 2026 मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होगा, जिसमें करीब पंद्रह करोड़ श्रद्धालु हिस्सा ले सकते हैं
- मुख्य स्नान चौदह जनवरी की रात से शुरू होकर पंद्रह जनवरी की दोपहर तक चलेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है
- मेले में सुरक्षा के लिए बारह सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और मैरीन फ्लेयर्स का उपयोग किया जाएगा
गंगासागर मेला 2026 इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है. मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाला यह मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है. इस साल मेले में रिकॉर्ड भीड़ जुटने की संभावना है. प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालु गंगासागर में पवित्र स्नान के लिए पहुंच सकते हैं.
मुख्य स्नान कब है?
मकर संक्रांति का मुख्य स्नान 14 जनवरी की रात से शुरू होकर 15 जनवरी की दोपहर तक चलेगा. यह समय बेहद शुभ माना जाता है और इसी दौरान लाखों श्रद्धालु गंगा और सागर के संगम पर स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे.
हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था
इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है. प्रशासन ने मेले में 1,200 CCTV कैमरे लगाए हैं, जो हर गतिविधि पर नजर रखेंगे. इसके अलावा पहली बार ‘मैरीन फ्लेयर्स' और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये तकनीक आपातकालीन सिग्नलिंग और भीड़ प्रबंधन में मदद करेगी. राज्य सरकार का दावा है कि सुरक्षा के लिए 24x7 कंट्रोल रूम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है.
नया गंगासागर सेतु: भविष्य की बड़ी तैयारी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में मुरीगंगा नदी पर 5 किलोमीटर लंबे 4-लेन पुल की आधारशिला रखी है. 1,670 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल अगले 2-3 वर्षों में तैयार होगा. इसके बन जाने के बाद श्रद्धालुओं को फेरी (नाव) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. यह प्रोजेक्ट गंगासागर तक पहुंच को आसान बनाएगा और मेले के दौरान होने वाली भीड़भाड़ को काफी हद तक कम करेगा.
ममता ने केंद्र पर साधा निशाना
गंगासागर मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी का भी मंच बन गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुंभ मेले की तरह गंगासागर को ‘राष्ट्रीय दर्जा' या फंड नहीं दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की उदासीनता के बावजूद राज्य सरकार अपने दम पर 2,500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पूरे कर रही है. ममता ने कहा, “हमारी संस्कृति और आस्था को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है.”
भावनाओं और आस्था का संगम
गंगासागर मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, लेकिन इस बार सुरक्षा और सुविधाओं के स्तर को देखते हुए यह आयोजन और भी खास होगा. प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्थ कैंप, मोबाइल टॉयलेट, ई-हेल्पलाइन और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी तैयार किए गए हैं.
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