- दिल्ली में एक फर्जी ईडी रेड के दौरान तीन नकली अधिकारी ने लाखों लूटे
- फर्जी अधिकारियों के साथ आईडी कार्ड, पुलिस वर्दी और वायरलेस डिवाइस थे
- घर में काम करने वाली नौकरानी ही निकली फर्जी रेड की मास्टरमाइंड
दिल्ली के पॉश इलाके में हुई इस फेक रेड ने सबको हैरान कर दिया है, क्योंकि यहां विलेन कोई बाहरी नहीं, बल्कि घर के अंदर छिपी 'विभीषण' निकली. वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड और रौबदार अंदाज के साथ आए फर्जी अधिकारियों ने घर के लोगों को डराकर लाखों के माल पर हाथ साफ कर दिया. पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से इस पूरी 'फिल्मी लूट' का पर्दाफाश किया है. आइए बताते हैं कि कैसे घर में काम करने वाली एक मेड ने इतनी शातिर जालसाजी कर डाली और ये फेक रेड कैसे हुई.
घरवालों के मोबाइल तक छीन लिए
दिल्ली पुलिस के अनुसार, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के डी-ब्लॉक इलाके में रहने वाले 86 साल के रिटायर्ड सीनियर आर्किटेक्ट आर.सी. सबरवाल के घर फर्जी रेड हुई. पुलिस की वर्दी पहने तीन लोग घर में घुसे और खुद को ED अफसर बताकर तलाशी शुरू कर दी. उन्होंने घरवालों को डरा-धमका कर मोबाइल फोन तक छीन लिए.
कैसे दिया पूरी वारदात को अंजाम?
ईडी के फर्जी अफसर अपनी बलेनो कार में सवार होकर आए थे. ये कार इस गिरोह के एक सदस्य उपदेश सिंह थापा के नाम पर ही रजिस्टर है. अपराधी पूरी तैयारी के साथ आए थे. उन्होंने ITBP डिप्टी कमांडेंट की वर्दी सहित पुलिस का यूनिफॉर्म पहना हुआ था.उनके पास फर्जी आईडी कार्ड और वायरलेस हैंडसेट भी थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो.
आर सी सभरवाल के घर में घुसे थे फर्जी ईडी ऑफिसर
घर के सदस्यों को कर दिया कमरे में बंद
इस वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि घर की मेड रेखा देवी ने ही सारी जानकारी अपराधियों को दी थी. उसने अपने साथियों को घर में मौजूद सदस्यों की संख्या, उनके डेली रूटीन और कीमती सामान के ठिकाने के बारे में पहले ही बता दिया था. आरोपियों ने परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया ताकि कोई पुलिस को जानकारी न दे सके. फर्जी अफसर घर में लूट मचाते रहे. इसी दौरान पीड़ित के पोते को शक हुआ तो उसने सवाल जवाब करना शुरू कर दिया. इसके बाद तीनों आरोपी 3-4 लाख नकद और 7 लग्जरी घड़ियां लेकर मौके से फरार हो गए.
कैसे पकड़े गए आरोपी?
ACP रवि शंकर और SHO राजेंद्र जैन की टीम ने इस हाई प्रोफाइल केस को सुलझाया. पुलिस ने इस केस को सॉल्व करने के लिए डिजिटल ड्रैगनैट तैयार किया. पुलिस ने इलाके के करीब 350 सीसीटीवी कैमरों को खंगाला. सराय काले खां से लेकर गाजीपुर बॉर्डर तक फुटेज को एक साथ जोड़ा गया. सीसीटीवी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 तक जा पहुंची, जहां आरोपियों की कार खड़ी मिली.
इसके अलावा पुलिस ने मोबाइल टावर डंप डेटा और IMEI ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया. इससे पता चला कि कुछ मोबाइल नंबर क्राइम सीन और वैशाली दोनों जगह एक्टिव थे. डेटा के आधार पर पुलिस पूजा राजपूत के घर पहुंची. लोकल इंटेलिजेंस से पता चला कि सबरवाल की मेड रेखा देवी अक्सर इसी पते पर आती-जाती है. इसके बाद पुलिस के लिए मामला सुलझाना आसान हो गया.
इसी कार का हुआ था इस्तेमाल
छापेमारी में मिला फर्जीवाड़े का सामान
25 फरवरी को जब पुलिस ने पूजा के घर छापा मारा, तो वहां लूट का सामान और अपराध में इस्तेमाल अन्य सामान मिले. पुलिस ने ITBP के डिप्टी कमांडेंट की वर्दी, एक वायरलेस सेट बॉक्स और फर्जी आईडी कार्ड बरामद किए. इसके अलावा पुलिस को घर से चोरी हुई सातों लग्जरी घड़ियां और गहने भी मिल गए.
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थाने के बाहर गिरफ्त में मेड
मास्टरमाइंड और उसकी ननद गिरफ्तार
पुलिस ने साजिश रचने वाली दो महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है. इसमें मास्टरमाइंड मेड रेखा देवी और उसकी ननद पूजा राजपूत शामिल हैं. वहीं अभी तीन आरोपी फरार हैं. पुलिस ने फरार आरोपियों की पहचान कर ली है. इसमें प्रकाश, मनीष और उपदेश सिंह थापा शामिल हैं. वारदात में इस्तेमाल बलेनो कार उपदेश के नाम पर ही रजिस्टर्ड है.
इस मामले में पुलिस ने BNS की धारा 318, 319, 329 और 3-5 के तहत मामला दर्ज किया है. ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली और और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं.
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