वैदिक ज्ञान से डिजिटल इंडिया तक... दिल्ली शब्दोत्सव-2026 में सभ्यता-संस्कृति के वैचारिक महाकुंभ का आगाज

100 से अधिक वक्ताओं, 40 से ज्यादा पुस्तकों के लोकार्पण, युवाओं के लिए ओपन माइक और दिल्ली-एनसीआर के 40 विश्वविद्यालयों की भागीदारी के साथ दिल्ली शब्दोत्सव-2026 राजधानी के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है.

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दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को 'दिल्ली शब्दोत्सव-2026' का भव्य आगाज हुआ. इस दौरान पूरा परिसर वैचारिक मंथन, सांस्कृतिक चेतना और सभ्यता के गौरव का अद्भुत संगम नजर आया. "भारत अभ्युदय" थीम के अंतर्गत इस तीन दिवसीय महोत्सव के अलग-अलग सत्रों में भारत की वैदिक जड़ों से लेकर आधुनिक डिजिटल इंडिया तक के सफर पर गहन विचार मंथन होगा. 

दिल्ली शब्दोत्सव-2026 की शुरुआत शुक्रवार दोपहर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा और तमाम लेखकों, विद्वानों और बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में हुई. महोत्सव के दौरान 5 विशेष मंच- मुख्य मंच, सांस्कृतिक मंच, साहित्यिक मंच, ओपन माइक और पैनल मंच सजे हैं. पहले दिन नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ कविता, संगीत और कलात्मक प्रस्तुतियों का अनूठा मिश्रण देखने को मिला. 

दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को 'दिल्ली शब्दोत्सव-2026' का भव्य आगाज हुआ

अतीत, वर्तमान और भविष्य से भारत का संवाद: CM

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आज इस मंच पर खड़े होकर साफ दिखाई देता है कि भारत किस तरह अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य से संवाद कर रहा है. शब्दोत्सव इस बात का साक्षी है कि वैदिक युग से लेकर वर्तमान डिजिटल युग तक भारत ने कितनी ऐतिहासिक यात्रा तय की है. सीएम ने आयोजन को सरकार की एक अनूठी सांस्कृतिक पहल और भारत के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक बताया. “कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी” का जिक्र करके उन्होंने कहा कि समय बदलेगा और युग बीत जाएंगे, लेकिन भारत शाश्वत बना रहेगा. 

आधुनिकता का अर्थ जड़ों से कटना नहींः रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री ने तकनीकी प्रगति के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी जोर देते हुए कहा कि आधुनिकता के इस दौर में हमें अपने बच्चों को किस तरह आगे बढ़ाना चाहिए कि वह अपनी संस्कृति से भी जुड़े रहें. उनका कहना था कि दिल्ली को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा के आदर्श मॉडल के रूप में काम करना चाहिए. 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तकनीकी प्रगति के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी जोर दिया

मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशों में भारत के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां हमारी अपनी जड़ों से बढ़ते कटाव को दिखाती हैं. उन्होंने विदेश में एक प्रदर्शनी और 'द केरल स्टोरी' से जुड़ी किताब का हवाला देते हुए कहा कि अगर सांस्कृतिक आधार मजबूत हो, तो सामाजिक परिणाम कहीं बेहतर मिल सकते हैं. उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर उन बच्चों का सही मार्गदर्शन मिला होता और उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़ा गया होता तो शायद हमारी बेटियां आज ज्यादा सुरक्षित होतीं. सीएम ने पिछले 10 महीनों में गणेश चतुर्थी से लेकर छठ पूजा तक के सांस्कृतिक आयोजनों का उल्लेख करते हुए विश्वास दिलाया कि यह महोत्सव आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगा. 

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दिल्ली बने भारत की सांस्कृतिक राजधानीः कपिल मिश्रा  

दिल्ली सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने 'शब्दोत्सव' को वैचारिक विमर्श का एक बड़ा मंच बताते हुए कहा कि दिल्ली केवल देश की राजनीतिक राजधानी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी बने. उनका कहना था कि जब सेना, पुलिस या मंदिरों पर पत्थर फेंके जाते हैं तो वह पत्थर हाथ में बाद में आता है, उससे पहले वह किसी के दिमाग में आकार लेता है. कपिल मिश्रा ने शब्दोत्सव को 'वैचारिक उग्रवाद और नक्सलवाद के खिलाफ एक सर्जिकल स्ट्राइक' करार दिया. उन्होंने बताया कि अगले तीन दिनों में यहां 40 से अधिक पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा. 

दिल्ली के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने 'शब्दोत्सव' को वैचारिक विमर्श का एक बड़ा मंच बताया.

स्वदेशी रक्षा उद्योगों पर भरोसा जरूरीः भदौरिया

महोत्सव के दौरान एक प्रमुख सत्र 'कमजोरी से ताकत की ओर' (From Vulnerability to Strength) रहा, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पर पैनल चर्चा की गई. इसमें पूर्व एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) राकेश भदौरिया, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह और रक्षा विशेषज्ञ प्रो. राजीव नयन ने हिस्सा लिया. संचालन कर्नल आलोक वत्सल ने किया. इस दौरान भारी भीड़ उमड़ी. 

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पूर्व वायुसेनाध्यक्ष राकेश भदौरिया ने भारत की स्वदेशी रक्षा योजना का जिक्र करते हुए घरेलू उद्योगों पर भरोसा जताने की बात कही. उनका कहना था कि जल्द ही LCA मार्क-2 का निर्माण होगा और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी आएंगे. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल ब्रह्मोस मिसाइल, रडार, जैमर और काउंटर ड्रोन तकनीक जैसी प्रणालियां पूरी तरह स्वदेशी हैं और हमारे रक्षा उद्योग की मजबूती को दर्शाती हैं. पूर्व वाइस एडमिरल (रिटायर्ड) शेखर सिन्हा ने बताया कि भारतीय सेना के पास इस वक्त तीन परमाणु संचालित पनडुब्बियां हैं.  सशस्त्र बलों के लिए अंडरवाटर ड्रोन भी विकसित किए जा रहे हैं.

आंतरिक सुरक्षा पर दिग्गजों का मंथन

भारत की आंतरिक चुनौतियां (India's Internal Challenges) विषय पर सत्र में पूर्व डीजीपी डॉ. एस.पी. वैद, पूर्व बीजेपी सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह और पूर्व डीजीपी जैकब थॉमस ने पुलिसिंग और शासन सुधारों पर बात की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. शुक्रवार के कार्यक्रमों का समापन सांस्कृतिक आयोजनों के साथ हुआ. माधव बैंड और हृदयदीप की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया.

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100 से अधिक वक्ताओं, 40 से ज्यादा पुस्तकों के लोकार्पण, युवाओं के लिए ओपन माइक मंच और दिल्ली-एनसीआर के 40 विश्वविद्यालयों की भागीदारी के साथ दिल्ली शब्दोत्सव-2026 राजधानी के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बनकर उभरा है. इसने दिल्ली को सिर्फ सत्ता का केंद्र नहीं बल्कि विचार, पहचान और विमर्श का जीवंत मंच बना दिया है. 

ये भी देखें- दिल्ली शब्दोत्सव 2026: नई दिल्ली में साहित्य, संस्कृति और विचारों का भव्य महाकुंभ

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