Exclusive: अशांति के पीछे विदेशी साज़िश, ईरान में स्थिति नियंत्रण है... NDTV से बोले भारत में ईरान के राजदूत 

राजदूत ने कहा कि आबादी का एक हिस्सा वैध आर्थिक और सामाजिक मांगें रखता है, लेकिन विदेशी एजेंटों और घुसपैठियों ने इन प्रदर्शनों को हिंसक बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई. इसके अलावा, ज़ायोनी शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकारियों ने बार‑बार कहा है कि प्रदर्शनकारियों के बीच मोसाद एजेंट मौजूद थे, जो आधिकारिक बयानों के अनुसार, अशांति को भड़काने में प्रत्यक्ष विदेशी हस्तक्षेप को दर्शाता है.

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
नई दिल्ली:

ईरान में महंगाई की वजह से शुरू हुआ प्रदर्शन, हिंसा के रुप में बदल गया.जहां तख्तापलट की मांग में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ.वहीं सोमवार को ईरान में तकरीबन 100 जगहों पर आयतुल्लाह खामनेई के समर्थन और विदेशी ताकतों के खिलाफ रैलियां निकली.वहीं क्या इस प्रदर्शन में कोई दूसरे देश का नागरिक या कोई भारतीय ज़ख्मी हुआ है.इन सभी तमाम मुद्दों पर NDTV संवाददाता अली अब्बास नकवी ने खास बात की भारत में  ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली से.

NDTV: ईरान में मौजूदा स्थिति क्या है? क्या आपके पास प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के बारे में कोई आंकड़े हैं?

राजदूत: शुरुआती दौर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मोसाद और संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े विदेशी तत्वों द्वारा हिंसा और असुरक्षा की ओर मोड़ दिया गया. शुरुआत से ही सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि वह प्रदर्शनकारियों की मांगें सुनने के लिए तैयार है, लेकिन दंगे, तोड़फोड़ और हिंसक कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगी. यह निश्चित है कि मारे गए लोगों में आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. ISIS जैसी क्रूर वारदातों जैसे सिर काटना, शव जलाना और इसी तरह की बर्बर घटनाओं के सबूत मिले हैं, जो दिखाता है कि ये आम प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि ISIS से जुड़े आतंकवादी और विदेशों से समर्थित संगठित आपराधिक समूह हैं. सौभाग्य से अब स्थिति नियंत्रण में है, और आज देशभर के कई शहरों में हुए बड़े जनसमर्थन कार्यक्रमों से स्पष्ट है कि जनता इस्लामी गणराज्य व्यवस्था के साथ है और किसी भी विदेशी देश को ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने की अनुमति नहीं देगी.


NDTV: इन अशांति के पीछे प्रदर्शनकारी कौन हैं?
राजदूत: आबादी का एक हिस्सा वैध आर्थिक और सामाजिक मांगें रखता है, लेकिन विदेशी एजेंटों और घुसपैठियों ने इन प्रदर्शनों को हिंसक बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई. इसके अलावा, ज़ायोनी शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकारियों ने बार‑बार कहा है कि प्रदर्शनकारियों के बीच मोसाद एजेंट मौजूद थे, जो आधिकारिक बयानों के अनुसार, अशांति को भड़काने में प्रत्यक्ष विदेशी हस्तक्षेप को दर्शाता है.
 

NDTV: इज़राइल के राजदूत का कहना है कि लोग शासन परिवर्तन चाहते हैं. इस पर आपका क्या कहना है?
राजदूत: ऐसे बयान प्रतिक्रिया के योग्य नहीं हैं. एक ऐसा शासन, जिसके प्रधानमंत्री पर गाज़ा में 70,000 से अधिक निर्दोष लोगों—ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे—की हत्या के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों में युद्ध अपराधी के आरोप हैं, और जिसने 12‑दिवसीय युद्ध में एक हजार से ज़्यादा ईरानी नागरिकों की हत्या की—उसे ईरानी जनता की इच्छा पर टिप्पणी करने का क्या अधिकार है?
इसके अलावा, इस शासन से जुड़े तत्वों के विरोध प्रदर्शनों को हिंसा की ओर धकेलने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं.

NDTV: ईरान में इंटरनेट बंद होने के कारण जिन भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है—क्या वे सुरक्षित हैं?
राजदूत: संपूर्ण स्थिति नियंत्रण में है और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष चिंता की बात नहीं है. इंटरनेट में अस्थायी बाधाएँ आई हैं, जिससे कुछ व्यक्तियों से संपर्क कठिन हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संचार पूरी तरह बंद है या वे किसी खतरे में हैं. हम ईरान के विदेश मंत्रालय के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं ताकि विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण पर निगरानी रखी जा सके और किसी भी संभावित समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.

Advertisement


NDTV: क्या किसी अन्य देश के नागरिक इन प्रदर्शनों में घायल या मारे गए हैं?
राजदूत: नहीं, अब तक किसी भी विदेशी नागरिक के घायल या मारे जाने की कोई रिपोर्ट नहीं है.

NDTV: कहा जा रहा है कि 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. क्या ये लोग ईरानी हैं या विदेशी?
राजदूत: गिरफ्तार किए गए लोग ऐसे उपद्रवी हैं जिनके विदेशी शक्तियों और बाहरी तत्वों से संबंध थे. उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को हिंसा में बदलने में सक्रिय भूमिका निभाई और युवाओं को असुरक्षा और अस्थिरता की ओर उकसाया. इन व्यक्तियों ने सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया मसलन मस्जिदों, सरकारी इमारतों, पुलिस वाहनों और आम लोगों के घरों में आग लगाई. ये कार्रवाइयाँ किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन से मेल नहीं खातीं और दिखाती हैं कि इनका उद्देश्य केवल डर, आतंक और अस्थिरता फैलाना था.

Advertisement

NDTV: एक मोसाद एजेंट की गिरफ्तारी की भी खबर है. उसके इरादे क्या थे और क्या हथियार बरामद हुए?
राजदूत: पुष्ट जानकारी के अनुसार, मोसाद से जुड़े एक एजेंट की गिरफ्तारी की खबर सही है और उसे सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में ले लिया है. उससे पूछताछ जारी है और उसके मिशन तथा नेटवर्क की जांच की जा रही है. सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, उसके पास और उसके साथियों के पास से विभिन्न प्रकार के हथियार—ठंडे और आग्नेय—बरामद हुए हैं. सबूत बताते हैं कि उन्होंने भीड़ के भीतर से गोलीबारी की, ताकि माहौल को भड़काया जा सके और डर फैलाया जा सके, और प्रदर्शनों को हिंसक रूप देने की साजिश को आगे बढ़ाया जा सके.वह विदेशी खुफिया सेवाओं से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य देश को अस्थिर करना और जनता की वैध मांगों का इस्तेमाल कर विदेशी राजनीतिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाना था.

NDTV: अंत में, भारत और दुनिया को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
राजदूत: दुनिया को, और खासकर भारत के लोगों और सरकार को, जो ईरान की तरह ही आतंकवाद के पीड़ित रहे हैं. मेरा संदेश यह है कि ईरान में जो हो रहा है वह सिर्फ आंतरिक अशांति या सामाजिक विरोध नहीं है, बल्कि ज़ायोनी शासन और अमेरिका द्वारा संचालित एक पूर्ण‑स्तरीय हाइब्रिड युद्ध का हिस्सा है. मस्जिदों को जलाना, निर्दोषों की हत्या, सुरक्षा बलों को जलाना और क्षत‑विक्षत करना, तथा सार्वजनिक संपत्ति का विनाश—ये वही पैटर्न हैं जो पहले ISIS द्वारा अपनाए गए थे. ईरान के दुश्मनों का उद्देश्य जनता की चिंता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को ध्वस्त करना और भू-राजनीतिक सीमाओं को बदलना है. यह परियोजना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगी—आतंकवाद की आग सीमाएँ नहीं पहचानती. पिछले वर्षों में ईरान ने ISIS के खिलाफ लड़ाई की अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर क्षेत्र, यूरोप और अन्य देशों को इसके प्रसार से बचाया है. आज हम फिर चेतावनी देते हैं कि यदि इन आतंकवाद‑समान कार्रवाइयों को सामान्य या अनदेखा किया गया, तो हिंसा के फैलने का खतरा वास्तविक है.
सतर्कता, सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयास आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हैं.
 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Owaisi Hijab PM: PM इन हिजाब की डिमांड, Faiz Khan ने Debate में Rashidi को धोया!
Topics mentioned in this article