प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश में पहली बार मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जब्त किए गए विमान (चार्टर्ड प्लेन) की नीलामी कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है. ईडी के हैदराबाद ज़ोनल ऑफिस ने 1 जुलाई 2026 को Hawker 800A विमान को सरकारी ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म MSTC के जरिए 3 करोड़ रुपये में बेच दिया. ईडी का कहना है कि इस नीलामी से मिलने वाली पैसे का इस्तेमाल अदालत की अनुमति मिलने के बाद ठगी के शिकार असली निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने में किया जाएगा. यह विमान 7 मार्च 2025 को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईडी की छापेमारी के दौरान जब्त किया गया था. यह कार्रवाई कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके प्रमुख अमरदीप कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई थी. जांच के दौरान ईडी ने विमान को जब्त कर लिया था.
कंपनी पर 792 करोड़ रुपये की ठगी का है आरोप
बाद में ईडी ने इस जब्ती को लेकर PMLA की निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के सामने आवेदन दाखिल किया. 18 अगस्त 2025 को विमान की जब्ती को वैध ठहराया गया. इसके बाद ईडी ने विमान बेचने की अनुमति मांगी, जिसे 20 नवंबर 2025 को मंजूरी मिल गई. अदालत से अनुमति मिलने के बाद ईडी ने नीलामी की प्रक्रिया पूरी की और 1 जुलाई 2026 को विमान 3 करोड़ रुपये में बेच दिया. ईडी की जांच के मुताबिक, हैदराबाद की कंपनी कैपिटल प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड ने कथित तौर पर एक फर्जी इनवॉइस डिस्काउंटिंग स्कीम चलाकर हजारों निवेशकों से करीब 792 करोड़ रुपये की ठगी की.
ED ने तीन लोगों को किया है गिरफ्तार
इस मामले में ईडी अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें अमरदीप कुमार के भाई संदीप कुमार, चार्टर्ड अकाउंटेंट शरद चंद्र तोषणीवाल और फाल्कन इनवॉइस डिस्काउंटिंग के सीईओ आर्यन सिंह छाबड़ा शामिल हैं. ईडी ने 29 सितंबर 2025 को इस मामले में अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी.ईडी का कहना है कि विमान की बिक्री से मिलने वाले 3 करोड़ रुपये सीधे सरकारी खाते में जमा होंगे.
इसके बाद विशेष PMLA अदालत की अनुमति मिलने पर यह राशि उन वास्तविक निवेशकों को लौटाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल की जाएगी, जिन्होंने इस कथित फर्जी स्कीम में अपना पैसा गंवाया है.ईडी ने अपने बयान में कहा कि एजेंसी का मकसद केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त कर पीड़ितों तक उनकी रकम वापस पहुंचाना भी है. एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस केस में और भी कार्रवाई हो सकती.
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