इसकी अकड़ हो गई खत्म..., मस्जिद के पास अवैध कब्जा हटने से यह शख्स इतना खुश क्यों है?

फैज-ए-इलाही मस्जिद के अवैध निर्माण पर कार्रवाई में 10 से 17 बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लगाई गईं, साथ ही 70 से ज्यादा डंपर मलबा हटाने के लिए तैनात किए गए.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाकर हालात नियंत्रण में लाए गए हैं.
  • अवैध निर्माण को हटाने के लिए 17 बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ सत्तर से अधिक डंपर मलबा हटाने में लगे हैं.
  • नगर निगम के 150 से ज्यादा कर्मचारी और दिल्ली पुलिस के लगभग 1 हजार जवान सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात किए गए.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम की ओर से चलाए गए अभियान के बाद इलाके में हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं, जबकि तोड़े गए अवैध ढांचों का मलबा हटाने का काम लगातार जारी है. तस्वीरों में बाद के हालात देखे जा सकते हैं. अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर एक स्थानीय दुकानदार का प्रतिक्रिया सामने आई है.

मैं कई दिनों से फैजलाई दरगाह पर नारियल सप्लाई करने का काम कर रहा हूं. मेरी पत्नी नारियल बेचती है और मैं भी बेचता हूं. सरकार जो भी कर रही है, वह बहुत अच्छा और तारीफ के काबिल है. मैं सरकार, रेखा गुप्ता और पीएम मोदी का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि वे हमारे साथ खड़े हैं. पहले गरीब लोगों की कोई सुनता भी नहीं था. शादियों के लिए गरीब हो या अमीर, सबसे 25,000-30,000 रुपये लिए जाते थे, और अब यह पूरी तरह बंद हो गया है.

स्थानीय दुकानदार

फैज-ए-इलाही मस्जिद के अवैध निर्माण पर कार्रवाई में 10 से 17 बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लगाई गईं, साथ ही 70 से ज्यादा डंपर मलबा हटाने के लिए तैनात किए गए. एमसीडी के 150 से अधिक कर्मचारी भी मौजूद रहे. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. दिल्ली पुलिस ने करीब 1000 जवानों की तैनाती की, जिनमें 9 जिलों के डीसीपी रैंक के अधिकारी शामिल थे. 


 

Featured Video Of The Day
Donald Trump की नजर दुनिया के सबसे ‘गंदे तेल’ पर! Venezuelan Oil बनेगा Climate Bomb? | Full Analysis