- पूरे देश में ईद मनाई गई लेकिन नमाजी मस्जिदों में काली पट्टी बांधकर शोक और विरोध व्यक्त किया गया
- सांसद मोहम्मद हनीफा और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने नमाज के दौरान काली पट्टी पहनी
- भारत के कई बड़े शहरों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए तथा ईरान पर हमलों की निंदा की गई
पूरे देशभर में शनिवार यानी आज ईद मनाई जा रही है,लेकिन नमाजी मस्जिद में ईद की नमाज पढ़ने तो आए तो उनके हाथों में काली पट्टी बंधी हुई थी. दिल्ली के इमामिया हॉल मस्जिद में सांसद मोहम्मद हनीफा ने भी हाथ पर काली पट्टी बांधी थी, वहीं उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी साथ नमाज पढ़ते हुए दिखे. कुछ लोगों ने काले कपड़े ही पहनकर अपना शोक व्यक्त किया.
हिंदुस्तान के कई बड़े शहर जिसमें लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, पुणे, कानपुर, कश्मीर, लद्दाख, अमरोहा, मोहम्मदी शाहजहांपुर, मितौली लखीमपुर खीरी, बरेली, देहरादून, हैदराबाद, बैंगलोर, अलीपुर, अहमदाबाद, मलेरकोटला, सामना, चंडीगढ़, लुधियाना, पटना, भोपाल आदि समेत भारत के कोने कोने में अमेरिका इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ.साथ ही ईरान पर हो रहे अमेरिका इजरायल के हमले और उनमें हुई आयतुल्लाह खामेनेई एवं 165 बच्चियों की शहादत को याद करके नमाजी रोए भी और हमले की कड़ी निंदा भी की.
हमारे रहबर शहीद हो गए अब कैसे मनाएं खुशियां?
दिल्ली के हुसैनिया हॉल आदर्श नगर के पेश इमाम मौलाना मज़हर हसन नकवी ने कहा कि हमारे रहबर जिनकी लोग तकलीद करते थे.. जिन्हें अपना रहबर मानते थे.अब वो शहीद कर दिए गए हैं तो किस तरह हम लोग अब ईद की खुशियां मनाएं.हम लोग आज विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.साथ ही ईद की नमाज, दुआएं सब कर रहे हैं क्योंकि ईद भी जरूरी है,लेकिन जैसे हर साल हम सब ईद मनाते थे, इस साल नहीं मना रहे हैं.
इमामिया हॉल में मौजूद अनवर मिर्जा ने बताया कि आज ईद की नमाज में सांसद हनीफा जान समेत मुख्तार अब्बास नकवी भी मौजूद थे. ज्यादातर नमाजियों ने आज काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्द किया.जैसे एक घर में एक बाप का निधन हो जाए तो कैसे उसके बच्चे और परिवार वाले खुशी मना सकते हैं ठीक उसी तरह हम लोग ईद तो मना रहे हैं,लेकिन कोई खुशी का इजहार नहीं कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें- भोपाल में 'काली ईद'; खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय का विरोध, काली पट्टियां और गम के बीच अदा की गई नमाज
भारत ही नहीं विश्वभर में लोग शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन
कुछ मौलाना और क्लेरिक्स ने कहा कि ईद पर ऐसा विरोध ठीक नहीं, लेकिन कई संगठनों ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से ज़ुल्म के खिलाफ आवाज बताया.यह विरोध सिर्फ भारत तक नहीं रहा.दुनिया भर में ईरान के समर्थन में प्रदर्शन हुए.भारत में शिया समुदाय ने खामेनेई को अपना आध्यात्मिक नेता माना और उनकी मौत पर गहरा दुख जताया.काली पट्टी बांधना एक पुरानी परंपरा है, जो शोक या विरोध दिखाने के लिए इस्तेमाल होती है.इस बार यह ईरान के हालात पर गुस्सा और संवेदना दिखाने का तरीका बना.लोग चाहते थे कि दुनिया इस अन्याय को देखे और अमन की बात हो.
यह भी पढ़ें- 6 साल बाद घर लौटा दिल्ली दंगों का आरोपी शरजील इमाम, बीमार मां को देखते ही छलके आंसू!













