- ED ने सहारा प्राइम सिटी की जमीन बिक्री मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की.
- ED को जांच में पता चला कि बेरहामपुर की 43 एकड़ जमीन में से 32 एकड़ जमीन कथित रूप से गलत तरीके से बेची गई थी.
- सहारा समूह पर पोंजी स्कीम चलाने और निवेशकों के पैसे का गलत उपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं.
प्रवर्तन निदेशालय के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 26 फरवरी 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए आंध्र प्रदेश के अनंतपुर, कर्नाटक के बल्लारी और ओडिशा के भुवनेश्वर व बेरहामपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई बेरहामपुर में Sahara Prime City Limited की जमीन बिक्री से जुड़े मामले में की गई. ED ने यह छापे PMLA के तहत चल रही जांच के दौरान मारे. यह पूरा मामला Humara India & Ors केस से जुड़ा हुआ है, जिसमें पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच चल रही है.
जांच के दौरान ED को पता चला कि बेरहामपुर की कुल 43 एकड़ जमीन में से करीब 32 एकड़ जमीन दिसंबर 2025 में कथित तौर पर गलत तरीके से बेच दी गई. आरोप है कि यह बिक्री एक ऐसे बोर्ड रेजोल्यूशन के आधार पर की गई जो पहले ही रद्द हो चुका था. जमीन एक सहारा कर्मचारी के पक्ष में ट्रांसफर की गई और यह सौदा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के खिलाफ बताया जा रहा है. ED का दावा है कि यह पूरा सौदा सहारा ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंधन के निर्देश पर किया गया. साथ ही, कागजों में दिखाई गई बिक्री कीमत और असली बाजार कीमत में बड़ा अंतर भी सामने आया है, जिससे अंडरवैल्यूएशन की आशंका जताई जा रही है.
छापेमारी के दौरान ED ने कई अहम डिजिटल और वित्तीय सबूत भी जब्त किए हैं. इनमें व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, कॉन्टैक्ट डिटेल, कंपनियों के अकाउंट बुक्स, बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक कागजात शामिल हैं. इन दस्तावेजों की अब फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि जमीन बिक्री के पीछे किस स्तर तक की साजिश और वित्तीय गड़बड़ी शामिल थी.
इससे पहले ED ने कई राज्यों में दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की थी. ये FIR आईपीसी की धारा 420 और 120B के तहत Humara India Credit Cooperative Society Ltd और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थीं. जानकारी के मुताबिक सहारा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के खिलाफ 500 से ज्यादा FIR दर्ज हैं, जिनमें से 300 से अधिक मामले PMLA के तहत शेड्यूल्ड ऑफेंस से जुड़े बताए जा रहे हैं.
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि सहारा ग्रुप पर पोंजी स्कीम चलाने के आरोप हैं. आरोप है कि निवेशकों से बड़ी मात्रा में पैसा जमा कराया गया, लेकिन मैच्योरिटी पूरी होने पर रकम लौटाने के बजाय उसे दोबारा निवेश दिखा दिया गया. खातों में हेरफेर कर असली देनदारियां छिपाई गईं और एक कंपनी से दूसरी कंपनी में भारी रकम ट्रांसफर की गई. अंत में भारी देनदारी चार सहकारी समितियों के खाते में दिखाई गई. जांच एजेंसी का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद समूह ने नए निवेश लेना जारी रखा, जिससे बकाया राशि और उस पर ब्याज लगातार बढ़ता गया.
ED के मुताबिक जमा की गई बड़ी रकम का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियां बनाने, संदिग्ध लोन देने और निजी खर्चों में किया गया, जिससे जमाकर्ताओं को उनका वैध पैसा नहीं मिल सका. इस मामले में अब तक पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं, जिनके तहत सहारा ग्रुप की कई जमीनें और अन्य संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं.
मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में अनिल वैलापरमपिल अब्राहम और ओ.पी. श्रीवास्तव फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. ED पहले ही दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. फिलहाल जांच जारी है.
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