- बंगाल और असम चुनाव के कारण दिल्ली से इन राज्यों की ट्रेनों में टिकट की मांग बढ़ गई है.
- 19 और 20 अप्रैल को बंगाल के पहले चरण मतदान से पहले किसी भी ट्रेन में टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है.
- असम में 9 अप्रैल को मतदान से पहले दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर भी भारी भीड़ और टिकट की कमी देखी जा रही है.
चुनाव के असर से ट्रेनों में सफर करना मुश्किल हो गया है. मतदान से पहले पश्चिम बंगाल और असम जाने वाली ट्रेनों में टिकट की जबरदस्त मांग देखी जा रही है. दिल्ली से पश्चिम बंगाल जाने वाली प्रमुख ट्रेनों- जैसे पूर्वा एक्सप्रेस, हावड़ा दूरंतो एक्सप्रेस और आनंद विहार–हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस में लगातार रिग्रेट का संदेश दिख रहा है, जबकि अन्य ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है.
23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान से पहले 19 और 20 अप्रैल की किसी भी ट्रेन में कंफर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो गया है. 29 अप्रैल से पहले भी हालात बेहतर नहीं हैं. 26 और 27 अप्रैल की ट्रेनों में भी लगभग सभी जगहें भर चुकी हैं. असम में 9 अप्रैल को मतदान से पहले भी दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर भारी भीड़ है. 6 अप्रैल की त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस और डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस में रिग्रेट दिख रहा है, जबकि अन्य ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना बेहद मुश्किल है. रेलवे सूत्रों का कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए मतदान से पहले स्पेशल या ऑन-डिमांड ट्रेनें चलाई जा सकती हैं.
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बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे. 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा. वोटों की गिनती 4 मई को होगी. पोलिंग बूथों पर पर्याप्त इंतजाम रहेंगे. साथ ही सुरक्षा की सख्त व्यवस्था रहेगी.
चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाता 3.28 करोड़, महिला मतदाता 3.16 करोड़ और थर्ड जेंडर 1152 मतदाता हैं. अगर फर्स्ट टाइम वोटर (18-19 साल) की बात करें तो उनकी संख्या 5.23 लाख है. 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के वोटरों की संख्या 1.31 करोड़ है. 85 साल से अधिक उम्र वाले मतदाता 3.79 लाख हैं. दिव्यांग वोटरों की संख्या 4.16 लाख है. ईवीएम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
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