दिल्ली एनसीआर मास्टर प्लान 2041 तैयार हो रहा है. अगले 15 सालों में एनसीआर के 24 जिलों की आबादी 7.5 करोड़ से दोगुनी बढ़कर 15 करोड़ तक होने का अनुमान है. इतनी बड़ी आबादी के राजधानी या उसके आसपास के जिलों में बसना और सफर करना चुनौतीपूर्ण होगा. लिहाजा सरकार एनसीआर के चारों राज्यों दिल्ली, यूपी, राजस्थान और हरियाणा के इन जिलों में ऐसा सुपरफास्ट कनेक्टिविटी नेटवर्क बना रही है, ताकि वो बिजनेस या ऑफिस के लिए अपने शहर से तेज आवाजाही कर सकें. इसी लिहाज से दिल्ली में 3 रेल कॉरिडोर बनाने की तैयारी है. रिंग रोड की तरह ये रेल कॉरिडोर शहर के सभी अहम प्वाइंट को जोड़ेगा. ये नमो भारत यानी रैपिड रेल के नेटवर्क से अलग है. दिल्ली से पानीपत-करनाल, दिल्ली से अलवर नमो भारत रूट भी तैयार हो रहा है.
ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का रूट
1. ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का पहला हिस्सा
कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) और कुंडली-मानेसर-पलवल (KGP) एक्सप्रेसवे के दोनों ओर एक दायरा बनाया जाएगा. पलवल, खुर्जा, मेरठ, बागपत, सोनीपत वाले रूट को लिंक करने का प्रस्ताव हरियाणा से उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया है. हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) सोनीपत से पलवल को जोड़ेगा. इसका करीब एक तिहाई निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.
2. ऑर्बिटल रेल का दूसरा कॉरिडोर
आर्बिटल रेल कॉरिडोर का दूसरा दायरा वेस्ट यूपी और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा. सोनीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाड़ी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत को रेल कॉरिडोर के दूसरे घेरे से जोड़ा जाएगा. यह रूट आगामी नोएडा एयरपोर्ट जेवर, राजस्थान के भिवाड़ी और हरियाणा के रेवाड़ी जैसे बड़े इंडस्ट्रियल हब को सीधे कनेक्ट करेगा.
3. रेलवे कॉरिडोर का तीसरा हिस्सा
दिल्ली एनसीआर के तीसरे सबसे बाहरी घेरा यानी आउटर मोस्ट रिंग का भी प्लान है. इसमें करनाल, जींद, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, अलवर, डिबाई, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर, मुजफ्फरनगर को रेल कॉरिडोर से जोड़ने की तैयारी है. इसकी फिजिबिलटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
हरियाणा से उत्तर प्रदेश, राजस्थान तक कनेक्टिविटी
हरियाणा में बन रहे 126 किलोमीटर लंबा पहला चरण 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है. इस परियोजना पर करीब 11,500 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है. इसे मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के साथ साझा किया जाएगा.
नमो भारत ट्रेन जैसा नेटवर्क बनेगा
इस रेल कॉरिडोर को दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर (Namo Bharat) के दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर लाइनों के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा शहरों को हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के नेटवर्क से जोड़ा जा सके. पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी (NLP) के तहत रेल कॉरिडोर को वेस्टर्न और ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा. इससे यूपी, दिल्ली समेत एनसीआर के राज्यों में माल ढुलाई का समय और खर्च बेहद कम हो जाएंगे.
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रोड, मेट्रो ट्रैफिक पर दबाव घटेगा
ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (KGP, KMP) के बाद भी भारी वाहनों का बड़ा हिस्सा सड़कों का इस्तेमाल करता है. ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर से मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी. दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे (NH-48), दिल्ली नोएडा फ्लाईओवर (DND) और NH-44 पर कमर्शियल वाहनों का दबाव घटेगा. दिल्ली मेट्रो, गुरुग्राम मेट्रो, नोएडा मेट्रो पर ट्रैफिक कंजेशन भी कम होगा.
नई सैटेलाइट टाउनशिप बनाई जाएंगी
रेल कॉरिडोर के आसपास बागपत, नूंह, शामली, झज्जर और डिबाई जैसे छोटे शहरों में सीधी हाई स्पीड कनेक्टिविटी वाली टाउनशिप और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को बढ़ावा मिलेगा.दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों पर आबादी का बोझ कम होगा.