- दिल्ली की आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को निचली अदालत ने आरोप मुक्त कर दिया
- सीबीआई ने निचली अदालत के आदेश को गलत और कानून के खिलाफ बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है
- सीबीआई का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने जांच में मिले अहम सबूतों को नजरअंदाज कर मामले की गलत व्याख्या की है
दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने उपरी अदालत में अपील की है. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को आरोप मुक्त किए जाने के निचली अदालत के आदेश को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इस याचिका पर हाई कोर्ट 9 मार्च को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के समक्ष होगी.
सीबीआई ने क्या कहा है?
सीबीआई ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के आदेश को “पूरी तरह गलत और कानून के खिलाफ” बताया है. जांच एजेंसी का कहना है कि निचली अदालत ने उन अहम सबूतों को नजरअंदाज कर दिया, जो आरोपियों की भूमिका और कथित साजिश की ओर इशारा करते हैं. सीबीआई के मुताबिक, उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में नियमों का उल्लंघन हुआ.
तथ्यों की गलत व्याख्या हुई: सीबीआई
एजेंसी ने यह भी दलील दी है कि ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि आरोप तय करने लायक कोई सामग्री नहीं है, तथ्यों और कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है. सीबीआई का तर्क है कि आरोप तय करने के स्तर पर विस्तृत साक्ष्य परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि प्रथम दृष्टया सामग्री का होना ही पर्याप्त होता है, जिसे अदालत ने नजरअंदाज कर दिया. इसके साथ ही सीबीआई ने जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर भी कड़ा ऐतराज जताया है.
एजेंसी का कहना है कि यह निर्देश न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि जांच प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है.अब 9 मार्च को होने वाली सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करेगा कि निचली अदालत का आरोप मुक्त करने का आदेश बरकरार रहेगा या नहीं. इस फैसले पर न केवल मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी, बल्कि आबकारी नीति केस से जुड़े राजनीतिक और कानूनी असर भी साफ होंगे.
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