दिल्ली की अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को UAPA मामले में सुनाई आजीवन कारावास की सजा

दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

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  • दिल्ली की अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को यूएपीए के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई
  • अंद्राबी की दो सहयोगी सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी इसी मामले में तीस साल कैद की सजा दी गई है
  • तीनों आरोपियों को यूएपीए की धारा 20, 38, 39 के साथ-साथ भादंसं की कई धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया गया है
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दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में दोषी पाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने सजा की अवधि पर दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुनाया. अदालत ने अंद्राबी की दो सहयोगियों - सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी इसी मामले में दोषी पाए जाने पर 30 साल कैद की सजा सुनाई.

इससे पहले 14 जनवरी को, अंद्राबी, फेहमीदा और नसरीन को यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने के लिए सजा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत दोषी ठहराया गया था. अदालत ने तीनों को भादंसं की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153 बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे), 120 बी (आपराधिक साजिश), 505 (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान) और 121 ए (भारत सरकार के खिलाफ अपराध करने की साजिश) के तहत भी दोषी ठहराया था.

एनआईए ने अंद्राबी को दोषी ठहराए जाने के बाद उसके लिए यह कहते हुए आजीवन कारावास की मांग की थी कि उसने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा और यह कड़ा संदेश देना आवश्यक है कि ऐसी साजिश रचने पर सबसे कठोर सजा दी जाएगी.

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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