बच नहीं पाओगे... 20 हजार जुर्माना दो या बॉर्डर से बाहर जाओ... दिल्ली में पुरानी कारों की एंट्री बैन

दिल्ली में प्रदूषण के चलते 12 लाख पुराने वाहनों (बीएस-6 से कम के) पर रोक लगा दी गई है. नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगेगा,दिल्ली में दूसरे राज्यों के पुराने वाहनों पर भी रोक लगा दी गई है. अगर आपके पास भी 8-10 साल पुरानी गाड़ी है तो चेक करा लें कि कहीं बीएस-4, बीएस-5 जैसी कैटेगरी का वाहन तो नहीं है आपके पास.

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Old Car Ban Delhi News: दिल्ली-नोएडा सीमा पर जहरीले धुएं की मोटी परत छाई हुई है, इस बीच चिल्ला बॉर्डर पर AQI 490 पहुंच गया है. ग्रैप-4 तो लागू है ही, लेकिन हालात बद से बदतर हो जा रहे हैं, इसमे सुधार होता नहीं दिख रहा.ग्रैप-4 के चलते दिल्ली आने वाले पुराने वाहनों की जांच तेज हो गई है. दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी दीपक ने कहा कि हम दिल्ली के बाहर पंजीकृत Non-BS-6 कमर्शियल और प्राइवेट वाहनों की कड़ी जांच कर रहे हैं. उल्लंघन करने वालों पर 20,000 रुपये का चालान लगाया जाएगा या उन्हें यू-टर्न लेने के लिए मजबूर किया जाएगा और जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) नहीं है, उन पर भी जुर्माना लगा रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने जांच के चलते कई जगहों पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं.

दिल्ली में पुरानी कारों की एंट्री पर बैन

मौके पर मौजूद उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हम उन कारों को रोक रहे हैं, जो देखने में पुरानी लगती हैं और जिन पर बीएस-6 मानक दर्शाने वाले नीले स्टिकर नहीं लगे हैं. हमें BS-III उत्सर्जन मानकों (या उससे कम) का पालन न करने वाले 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर जुर्माना लगाने का भी निर्देश दिया गया है.

फरीदाबाद के रहने वाले राकेश को बीएस-3 हुंडई क्रेटा चलाते हुए रोका गया तो उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में असमर्थ है और हमें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. मैं फरीदाबाद में रहता हूं और मुझे इस नियम के बारे में पता ही नहीं था. ट्रैफिक पुलिस मनमाने ढंग से गाड़ियों की जांच कर रही है. हम रोड टैक्स तो देते हैं, लेकिन सरकारी बसों का क्या? उनकी जांच नहीं हो रही. बता दें कि जांच करने के लिए पोर्टेबल मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है जिसमें गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर बीएस के मानदंडों और PUCC की जानकारी तुरंत ले ली जाती है.

सर्दियों में गाड़ियों से PM2.5 लेवल के उत्सर्जन में 20% से अधिक का योगदान होता है, दिल्ली-एनसीआर के 28 लाख वाहनों में से 93% हल्के मोटर वाहन और दोपहिया वाहन हैं. इनमें से लगभग 37% बीएस-III या उससे पुराने हैं, जो 31 गुना अधिक पार्टिकुलेट मेटर और 16 गुना अधिक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं.

दिल्ली में प्रदूषण से हालात खराब

दिल्ली के परिवहन अधिकारी दीपक ने आगे कहा कि मीडिया के माध्यम से लोगों को अब तक गाड़ियों के प्रदूषण के बारे में पता चल जाना चाहिए. अगर गाड़ियों के मालिक वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं तो हमने चौकियों पर सुरक्षा बल तैनात कर रखे हैं. दिल्ली यातायात पुलिस और परिवहन दल हर जगह मौजूद हैं, वे बच नहीं सकते. राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन जागरूकता से ही गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण से निपटने में मदद मिल सकती है.

कई दिनों तक गंभीर वायु गुणवत्ता के बाद दिल्ली में बाहर पंजीकृत गैर-बीएस VI वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है. NCR में सर्दियों के दौरान PM 2.5 उत्सर्जन में गाड़ियों का 20-40 प्रतिशत योगदान होता है, जिसमें पुराने वाहन कहीं अधिक प्रदूषण का उत्सर्जन करते हैं. प्रदूषण को लेकर कई उपाय सरकार द्वारा अपनाए जा रहे हैं. दिल्ली में PM2.5 लेवल के प्रदूषण में गाड़ियों का योगदान करीब 40 प्रतिशत है. PUC प्रणाली में प्रदूषण के छोट-छोटे कणों को प्रभावी ढंग से मापने में विफल है, हालांकि सरकार कदम उठा रही है, देखते हैं आगे क्या होता है. 

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