- दाऊद इब्राहिम से जुड़ी रत्नागिरी की चार कृषि जमीनों की नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने सबसे ऊंची बोली लगाई
- ये जमीनें SAFEMA कानून के तहत केंद्र सरकार द्वारा जब्त की गईं और रत्नागिरी जिले के मुंबाके गांव में स्थित हैं
- नीलामी में सबसे अधिक चर्चा सर्वे नंबर 442 की रही, जिसकी रिजर्व कीमत से अधिक बोली लगी है
कुख्यात भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ी रत्नागिरी की पुश्तैनी जमीनों को आखिरकार खरीदार मिल गया है. केंद्र सरकार की तरफ से 5 मार्च को कराई गई नीलामी में मुंबई के एक बोलीदाता ने इन सभी चार कृषि जमीनों के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई है. ये नीलामी स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (प्रॉपर्टी जब्ती) कानून (SAFEMA) के तहत की गई, जिसके जरिए लंबे समय से अटकी हुई इन संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है. ये चारों जमीनें रत्नागिरी जिले के खेड तालुका के मुंबाके गांव में हैं, जो दाऊद इब्राहिम का पैतृक गांव माना जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कई जमीनें पहले उसकी मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं.
कौन है खरीदार और आगे क्या होगा?
दाऊद इब्राहिम की जमीन की नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने वाला शख्स मुंबई का बताया जा रहा है, हालांकि उसकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. नियमों के मुताबिक, उसे अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी रकम जमा करनी होगी. इसके बाद संबंधित प्राधिकरण की अंतिम मंजूरी मिलेगी और फिर इन संपत्तियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
पहले क्यों नहीं बिक रही थीं ये जमीनें?
दिलचस्प बात ये है कि इन जमीनों को बेचने की कोशिश पिछले कई सालों से चल रही थी, लेकिन हर बार नीलामी फेल हो जाती थी. नवंबर 2025 में भी रिजर्व प्राइस करीब 30% घटाने के बावजूद कोई खरीदार सामने नहीं आया. सूत्रो के मुताबिक, दाऊद और डी-कंपनी से जुड़ा नाम होने की वजह से लोग इन प्रॉपर्टीज़ से दूरी बनाते रहे. इसके अलावा गांव में होना, सिर्फ खेती के इस्तेमाल की शर्तें, और तुरंत कोई बड़ा फायदा न दिखना भी वजह बनी.
किस जमीन पर कितनी बोली लगी?
चारों जमीनों में सबसे ज्यादा चर्चा सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B) की रही. इसकी रिजर्व कीमत करीब 9.41 लाख रुपये थी, लेकिन नीलामी में इसके लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा की बोली लगी. इस प्लॉट के लिए दो लोगों ने बोली लगाई थी—एक मुंबई से और दूसरा रत्नागिरी से. बाकी तीन जमीनें (सर्वे नंबर 533, 453 और 61) के लिए सिर्फ एक ही बोलीदाता सामने आया, जिसने सभी शर्तें पूरी करते हुए इन्हें खरीद लिया.
1990 के दशक से जुड़ा है मामला
ये सभी जमीनें कासकर परिवार की पुश्तैनी संपत्ति का हिस्सा थीं, जिन्हें 1990 के दशक में जब्त किया गया था. बाद में इन्हें SAFEMA के तहत केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया था. ये कार्रवाई संगठित अपराध और खासतौर पर 1993 मुंबई ब्लास्ट से जुड़े मामलों के बाद की गई थी.
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बार-बार फेल हुई नीलामी
इन संपत्तियों की नीलामी 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार या तो कोई बोलीदाता नहीं आया या प्रक्रिया अधूरी रह गई. दाऊद से जुड़ी संपत्तियों की नीलामी में दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव का नाम भी काफी चर्चा में रहा है. उन्होंने 2001 में मुंबई के नागपाड़ा इलाके की दो यूनिट खरीदी थीं, लेकिन आज तक उन्हें उनका कब्जा नहीं मिल पाया है और मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है.
उन्होंने 2020 में मुंबाके गांव में दाऊद का पुश्तैनी बंगला भी खरीदा था और वहां ट्रस्ट बनाने की बात कही थी. वहीं 2024 में उन्होंने एक छोटे प्लॉट (सर्वे नंबर 617) के लिए 2.01 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जबकि उसकी रिजर्व कीमत सिर्फ 15,440 रुपये थी. हालांकि बाद में पेमेंट नहीं होने की वजह से वो डील रद्द कर दी गई थी.
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