महाराष्ट्र के शहर मुंबई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अंधेरी में एक 69 साल के रिटायर्ड अफसर को डेढ़ करोड़ रुपये का चूना लगाया गया. साइबर क्रिमिनल्स ने 25 दिनों तक उन्हें घर में डिजिटली कैद रखा. सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज के नाम का हवाला देते हुए वीडियो कॉल से ऑनलाइन अदालत भी लगाई और उन्हें धमकाया. मुंबई पुलिस ने पीड़ित अफसर की शिकायत पर जब एक्शन लिया तो चौंकाने वाली कहानी सामने आई. साइबर सेल ने इस केस में अशोक पाल ऑटोरिक्शा ड्राइवर को गिरफ्तार किया, जो रैकेट का बड़ा सूत्रधार था. उसने मोटे कमीशन के बदले ठगों को अपने बैंक खाते का इस्तेमाल पैसा ट्रांसफर करने के लिए दिया.
खुद को दूरसंचार विभाग का अफसर बताया
पुलिस का कहना है कि पीड़ित अफसर को संजय गुप्ता नाम के शख्स ने फोन किया. उसने खुद को टेलीकॉम विभाग का अफसर बताया. मोबाइल कॉल करने वाले ने कहा कि अफसर के मोबाइल नंबर से गंदे एमएमएस मैसेज भेजे जा रहे हैं. बांद्रा क्राइम ब्रांच में डिजिटल अरेस्ट को लेकर केस दर्ज किया गया है.
फिर हेराफेरी का मामला
फिर मोबाइल कॉल प्रदीप सावंत नाम के शख्स को ट्रांसफर की गई. उसने खुद को पुलिस अफसर बताते हुए अफसर को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन आने को कहा. फिर धोखाधड़ी करने वालों ने उस पर पैसे की हेराफेरी और कारोबारी नरेश गोयल से जोड़कर बताकर उसे धमकाया. मामले में उसके खिलाफ सबूत होने का किया गया. आरोपियों ने फर्जी वीडियो कॉल से फर्जी अदालत दिखाई. उसे पूर्व चीफ जस्टिस बीएस गवई की अदालत जैसा दिखाया. पीड़ित को धमकाया गया कि उसने सहयोग नहीं किया तो उस पर कानूनी एक्शन के साथ गिरफ्तारी होगी.
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एफडी-म्यूचुअल फंड सब ट्रांसफर कराया
धोखेबाजों ने पीड़ित को झांसे में लेकर सभी बैंक खाते, एफडी, म्यूचुअल फंड को वेरीफाई करने के नाम पर सारा पैसा कुछ बैंक खातों में ट्रांसफर करने को कहा. गिरफ्तारी करने के भय से पूर्व अफसर ने 8 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए. धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब मनी ट्रांसफर के बाद आरोपियों के मोबाइल अचानक बंद हो गए, जिससे संदेह पैदा हुआ. परिवार वालों और करीबियों से सलाह के बाद अफसर ने साइबर सेल से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई.
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ऑटो रिक्शा चालक निकला सूत्रधार
साइबर सेल की जांच में पता लगा कि रकम का एक बड़ा हिस्सा अशोक पाल के बैंक अकाउंट से दूसरे खातों में ट्रांसफर हुआ था. पूछताछ में उसने कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने की मंजूरी देने की बात कबूल की. इससे पूरे मामले का खुलासा होते देर न लगी.














