- ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने का फैसला किया है
- संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, एक राज्य में एक समय में दो CM नहीं हो सकते और सत्ता हस्तांतरण तुरंत होना चाहिए
- नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक ममता पद पर रह सकती हैं, लेकिन बहुमत वाली पार्टी को CM चुनने का अधिकार
पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इस्तीफा नहीं देने के फैसले का ऐलान कर सबको चौका दिया है. संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक, आजादी के बाद ममता बनर्जी पहली मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने विधान सभा चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है.
ममता बनर्जी के फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों की राय
लोक सभा के सेक्रेटरी जनरल और संविधान विशेषज्ञ पी डी टी अचारी ने एनडीटीवी से कहा, 'किसी राज्य में एक ही समय में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते. साथ ही, सत्ता हस्तांतरण में अंतराल भी नहीं हो सकता. नियमों के अनुसार, राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) जारी होने के बाद, राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित करेंगे. शपथ लेने के बाद, वह तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री बन जाएंगे.'
पी डी टी आचार्य के मुताबिक, ममता बनर्जी केवल नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक ही मुख्यमंत्री रह सकती हैं. बहुमत जीतने वाली पार्टी को अपना मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार है. चुनाव हारने वाली पार्टी ये अधिकार खो देती है. ममता बनर्जी के इस्तीफे ना देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्वनी दुबे ने असंवैधानिक करार दिया है.
अश्वनी दुबे ने एनडीटीवी से कहा, 'गवर्नर किसी भी राज्य में कंस्टीटूशन का हेड होता है. उसके पास पावर होता है कि अगर कोई पार्टी बहुमत में नहीं है तो उसके खिलाफ वो कानून के मुताबिक कोई भी फैसला ले सकता है. ममता बनर्जी का ये कहना की मैं इस्तीफा नहीं दूंगी ये संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है. गवर्नर कानून के तहत शासन चले इसके लिए कोई भी फैसला ले सकते हैं.'
अश्वनी दुबे के मुताबिक, किसी भी विधान सभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और पांच साल पूरा होने के बाद वहां नए मंत्रिमंडल का गठन होता है. लेकिन ममता बनर्जी ने परंपरा के अनुसार इस्तीफा नहीं देने का फैसला किया है.
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एक्सपर्ट्स ने क्या बताया?
संविधान विशेषज्ञ पी डी टी आचार्य ने कहा कि 7 मई को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है. अगर मुख्यमंत्री तब तक इस्तीफा नहीं देती हैं , तो राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा. नई सरकार के गठन तक राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा. ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी रह सकती है इससे संविधानिक दिक्कत राज्य में नहीं आएगी. उनका 5 साल का कार्यकाल 8 को खत्म हो रहा है उसके बाद नए मुख्यमंत्री को शपथ दिलाई जाएगी. ममता बनर्जी के सीएम बने रहने से कोई दिक्कत नहीं होगी. वैसे भी अगर राज्यपाल उनका इस्तीफा लेते तो उन्हें केयरटेकर चीफ मिनिस्टर बनाया जाता.
सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने कहा कि ममता बनर्जी एक ऐसी राजनेता हैं जो सत्ता से चिपके रहने के लिए इतनी बेताब हैं कि उन्हें यह नहीं पता कि गरिमा के साथ पद कैसे छोड़ा जाए. गरिमा के साथ पद न छोड़ने का नतीजा यह होगा कि उन्हें अपमानजनक तरीके से बर्खास्त करना पड़ेगा. यह कोई संवैधानिक संकट नहीं है, यह बस ममता बनर्जी को बहुत ही बुरी रोशनी में दिखाता है. क्योंकि अब, अपने खिलाफ आए चुनावी फैसले के बाद, वह चुनावी जनादेश की व्याख्या अपने हिसाब से करने का फैसला कर रही हैं. यह उनका काम नहीं है; ऐसा करना पश्चिम बंगाल की जनता का बहुत बड़ा अपमान है. यह जताना कि वह अपरिहार्य हैं, कि वह कभी हार ही नहीं सकतीं, और अगर वह हारी भी हैं, तो उन कारणों से जिन्हें वह साबित नहीं कर पा रही हैं.
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