- सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर पद पर पदोन्नति देने का निर्णय शुक्रवार को लिया है.
- आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने पुरोहित के रिटायरमेंट पर रोक लगाई थी और सेवा लाभ संबंधी याचिका पर सुनवाई की.
- पुरोहित ने मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबित मुकदमे के कारण करियर में प्रमोशन न मिलने की शिकायत की थी.
भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति देने के लिए क्लियरेंस दे दी है. सूत्रों के अनुसार, यह फैसला शुक्रवार को लिया गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) ने उनके रिटायरमेंट पर रोक लगाई थी.
लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित का रिटायरमेंट 31 मार्च 2026 को होना था. हालांकि, उन्होंने प्रमोशन और उससे जुड़े सेवा लाभ न मिलने को लेकर AFT का रुख किया था. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि उनका रिटायरमेंट तब तक स्थगित रखा जाए, जब तक उनकी वैधानिक शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता.
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'मालेगांव केस के चलते तरक्की हुई प्रभावित'
AFT में दाखिल याचिका में पुरोहित ने दलील दी थी कि 2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबे समय तक चले मुकदमे के कारण उनके करियर की तरक्की प्रभावित हुई. उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी की वजह से उन्हें सेना के पदानुक्रम में समय पर प्रमोशन का उचित अवसर नहीं मिल सका.
क्या था मालेगांव केस?
गौरतलब है कि 31 जुलाई को मुंबई की NIA विशेष अदालत ने मालेगांव बम विस्फोट मामले में कर्नल पुरोहित समेत 7 आरोपियों को बरी कर दिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. इस मामले में शुरू में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन अंततः सात आरोपियों पर ही आरोप तय हुए थे.
पुरोहित के साथ जिन अन्य लोगों को बरी किया गया, उनमें पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधांकर धर द्विवेदी (शंकराचार्य) और समीर कुलकर्णी शामिल हैं.
सेना ने ब्रिगेडियर पद के लिए माना योग्य
सूत्रों का कहना है कि सेना ने पुरोहित के सेवा रिकॉर्ड और सभी प्रासंगिक पहलुओं की समीक्षा के बाद उन्हें ब्रिगेडियर पद के लिए योग्य मानते हुए मंजूरी दी है. अब उनकी पदोन्नति से जुड़ी औपचारिक अधिसूचना जारी की जानी बाकी है. इस फैसले को भारतीय सेना में पदोन्नति प्रक्रिया और न्यायिक आदेशों के पालन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.













