बंगाल में ऐसा क्या हुआ कि आधी रात के बाद फोन लगाते रहे CJI, 7 पेज के ऑर्डर में मालदा हॉरर की पूरी कहानी

मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर CJI ने आधी रात को कड़ा रुख अपनाया. 7 पेज के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'प्रायोजित साजिश' बताते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती और CBI जांच के निर्देश दिए हैं.

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  • सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्य कांत ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में स्वतः संज्ञान लिया
  • मालदा में बीडीओ कार्यालय में सात न्यायिक अधिकारियों को असामाजिक तत्वों ने तीन घंटे तक घेर रखा था
  • प्रशासन ने सुबह के 8 बजे तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की जिससे न्यायिक अधिकारियों को भोजन और पानी तक नहीं मिला
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मालदा हॉरर पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट बंगाल के सरकारी अफसरों पर बरसा. कारण है बुधवार रात के वो तीन घंटे, जिनमें CJI सूर्य कांत अपने सात न्यायिक अफसरों को भीड़ से छुड़ाने की कोशिश में जुटे थे. आखिरकार तमाम कोशिशों के बाद रात 11 बजे से 1.44 बज गए. फिर बड़ी मशक्कत के बाद हालात सामान्य तो हुए लेकिन CJI ने इस मामले में स्वत: संज्ञान ले लिया और गुरुवार सुबह के लिए सुनवाई तय कर दी. सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक बुधवार देर रात 11 बजे घटना के संबंध में CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का वाट्सएप मैसेज आया. उन्होंने दोनों को मालदा की घटना की जानकारी दी.

सीजेआई ने खुद संभाला मोर्चा

इसके बाद से ही CJI सूर्य कांत ने मामले में निगरानी शुरू की और जरुरी दिशा-निर्देश दिए. यहां तक कि उनके पास बार-बार सूचना आ रही थी कि पश्चिम बंगाल के अफसर इस मामले में सहयोग नहीं कर रहे हैं. CJI लगातार हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के संपर्क में थे और जानकारी ले रहे थे. हालात देखकर CJI सूर्य कांत ने देर रात इस मामले में स्वत: संज्ञान भी ले लिया. बुधवार शाम 3.30 बजे से शुरू हुए इस हॉरर को CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सात पेज के अपने आदेश में उकेरा है.

'प्रशासन ने काफी देर तक नहीं की कोई कार्रवाई'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'कल रात देर से, हमारे पास कलकत्ता हाईकोर्ट  के चीफ जस्टिस का व्हाट्सएप संदेश आया, जिसमें बताया गया कि सात न्यायिक अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं को मालदा जिले के कालियाचौक क्षेत्र में BDO कार्यालय में असामाजिक तत्वों द्वारा घेर लिया गया. यह घेराव लगभग 3:30 बजे शुरू हुआ, जिसके बाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने तुरंत राज्य प्रशासन को सूचित किया और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में 8:30 बजे तक प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.

आदेश में आगे कहा गया, 'इस स्थिति के कारण, रजिस्ट्रार जनरल ने चीफ जस्टिस के साथ एक ग्रुप कॉल के जरिए से होम सेक्रेटरी और डीजीपी से संपर्क किया. अधिकारियों ने मौखिक आश्वासन दिया कि वे तुरंत कार्रवाई करेंगे. फिर भी कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं हुई. हमें सूचित किया गया कि स्थिति इतनी गंभीर थी कि न्यायिक अधिकारियों को भोजन और पानी भी नहीं दिया गया.चीफ जस्टिस ने यह भी बताया कि न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक उस BDO कार्यालय तक पहुंचे जहां अधिकारी घेराव में थे.

'चीफ जस्टिस के घर पहुंचे डीजीपी और होम सेक्रेटरी'

मुख्य न्यायाधीश को इसके बाद पुलिस महानिदेशक और होम सेक्रेटरी से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करना पड़ा और उनके निवास पर स्थिति की निगरानी करनी पड़ी. इस समय, हाईकोर्ट के कुछ सीनियर जज भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जुड़े हैं. अंत में होम सेक्रेटरी और डीजीपी चीफ जस्टिस के निवास पर मध्यरात्रि के बाद पहुंचे, और न्यायिक अधिकारियों को रात 12 बजे के बाद मुक्त कराया गया.

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'अधिकारियों की गाड़ियों पर बरसाए पत्थर'

चौंकाने वाली बात यह है कि जब न्यायिक अधिकारी रिहा हुए और अपने ठिकानों की ओर जा रहे थे, तो उनकी गाड़ियों पर पत्थर, बांस और ईंटें फेंकी गईं इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सिविल और पुलिस प्रशासन की देर से कार्रवाई की कड़ी निंदा की. हमें यह जानकर भी निराशा हुई कि मुख्य सचिव का संपर्क नहीं हो सका क्योंकि उन्होंने व्हाट्सएप सुविधा वाला मोबाइल नंबर साझा नहीं किया था, जिससे उनसे कोई संचार संभव नहीं हो सका.

यह भी बताया गया कि कल कोर्ट में सुनवाई के बाद सभी जिला जजों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया गया ताकि न्यायिक अधिकारियों को प्रेरित किया जा सके कि वे 5 अप्रैल तक बाकी काम पूरा करें, विशेष रूप से उन जिलों में जहां पहले चरण में मतदान होने वाला है हमें बताया गया कि सम्मेलन के बाद न्यायिक अधिकारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने सही रूप से संकेत दिया कि इस घटना से न्यायिक अधिकारियों में भय पैदा हो सकता है, जो लगातार बिना छुट्टी के काम कर रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा,'इस घटना को केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का प्रयास नहीं माना जा सकता, बल्कि यह कोर्ट के अधिकारों को चुनौती देने वाला सुनियोजित और जानबूझकर किया गया हमला है यह घटना सामान्य नहीं है और स्पष्ट रूप से न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने और बाकी मामलों में आपत्तियों के निपटान में बाधा डालने के लिए की गई है. हम बिना हिचकिचाए यह कह सकते हैं कि हम किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने और न्यायिक अधिकारियों के मन में भय पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे.

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