युवाओं को नौकरी दिलाने के बहाने रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्रों में भेजने वाले नेटवर्क का CBI ने किया पर्दाफाश

मुख्य सूत्रधार फैसल उर्फ ​​बाबा वसई का रहने वाला है और वह फिलहाल दुबई में रह रहा है, सीबीआई की टीम फैजल के घर पहुंची

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यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध पिछले दो साल से अधिक समय से चल रहा है (प्रतीकात्मक फोटो).
मुंबई:

भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्रों में भेजने के एक बहुराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश सीबीआई ने किया है. सीबीआई ने यह मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है. इस नेटवर्क के तार वसई (मुंबई) तक पहुंच गए हैं. इस मामले का मुख्य सूत्रधार फैसल उर्फ ​​बाबा वसई का ही रहने वाला है और वह फिलहाल दुबई में रह रहा है.

सीबीआई की एक टीम सात मार्च को वसई में फैजल के घर पर पहुंची. टीम ने फैसल सोफियान और उनकी पत्नी पूजा के घर पर शाम चार बजे से रात 10 बजे तक जांच की.

फैसल बाबा ब्लॉग नाम के यूट्यूब चैनल के जरिए भारतीय युवाओं से विदेश में नौकरी दिलाने का वादा कर रहा था. अब खुलासा हुआ है कि पति-पत्नी सोफियान और पूजा भारतीय युवकों के दस्तावेज लेकर उनको फैसल को भेज रहे थे.

फैजल उर्फ ​​बाबा वसई के सुरुचि बाग इलाके में वेंचुरा रेशीदेन्शी कॉम्प्लेक्स में रहता था जबकि सोफियान और पूजा उसके सामने साईं आशीर्वाद बिल्डिंग में रहती हैं.  सीबीआई की टीम ने कल साईं आशीर्वाद बिल्डिंग में जाकर जांच की है.

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समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, सीबीआई ने इस मानव तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है. इसमें शामिल रूस में रह रहे दो एजेंट के बारे में भी एजेंसी जानकारी जुटा रही है. अधिकारियों ने बताया कि ये एजेंट रूस आने वाले भारतीयों का पासपोर्ट अपने पास कथित रूप से जमा कर लेते थे और उन्हें सशस्त्र बलों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया करते थे.

राजस्थान की रहने वाली क्रिस्टीना और मोइनुद्दीन छीपा रूस में हैं और दोनों ही भारतीय युवाओं को वहां लुभावनी नौकरियों का झांसा देकर तस्करी किया करते थे. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी की एफआईआर में भारत भर में फैली 17 अन्य वीजा कंसल्टेंसी कंपनियों, उनके मालिकों और एजेंटों को नामजद किया गया है. सीबीआई ने सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और मानव तस्करी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है.

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सीबीआई ने आरोप लगाया कि आरोपी व्यक्ति अपने एजेंटों के जरिए भारतीय नागरिकों को रूसी सेना, सुरक्षा गार्ड, सहायक, बेहतर जीवन और शिक्षा से संबंधित नौकरियां दिलाने के बहाने रूस में तस्करी किया करते थे और पीड़ितों से अवैध रूप से बड़ी रकम वसूला करते थे. एजेंटों ने विद्यार्थियों को रियायती शुल्क और वीजा में विस्तार की पेशकश कर सरकारी विश्वविद्यालयों के बजाय रूस में संदिग्ध निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिलाकर स्थानीय एजेंटों की दया पर छोड़ दिया.

अधिकारियों के मुताबिक, जब यह भारतीय रूस पहुंचे तो वहां के एजेंटों ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और उन्हें लड़ाकू प्रशिक्षण के बाद सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया.

सीबीआई ने एफआईआर में बताया, ''उन्हें (तस्करी कर रूस ले जाए गए भारतीय) लड़ाकू प्रशिक्षण के साथ-साथ रूसी सेना की वर्दी और बैच प्रदान किए गए. इसके बाद इन भारतीय नागरिकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में अग्रिम ठिकानों पर तैनात कर उनके जीवन को खतरे में डाल दिया गया.''

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी को ऐसी 35 घटनाओं के प्रमाण मिले हैं, जिनमें सोशल मीडिया, स्थानीय संपर्कों और एजेंटों के माध्यम से उच्च वेतन वाली नौकरियों के झूठे वादे का लालच देकर युवाओं को रूस ले जाया गया.

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एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने देशभर में 13 स्थानों पर छापेमापी भी की, जिसमें दिल्ली, तिरुवनंतपुरम, मुंबई, अंबाला, चंडीगढ़, मदुरै और चेन्नई शामिल हैं.

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