केरल का नाम बदलने पर कैबिनेट ने लगाई है मुहर, जान लीजिए क्या होती है नाम बदलने की प्रक्रिया ? 

विधानसभा की इसी सिफारिश को मानते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रालय को कैबिनेट नोट तैयार करने का निर्देश दिया था जिसपर आज कैबिनेट ने मुहर लगा दी . संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार अनुच्छेद 3 में किसी राज्य का नाम बदलने का प्रावधान किया गया है .

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केरल का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है
  • केरल विधानसभा ने मलयाली भाषा के अनुरूप राज्य का नाम केरलम करने के लिए सरकार को अनुशंसा की थी
  • संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत नाम परिवर्तन के लिए राष्ट्रपति के बिल को विधानसभा की अनुमति लेना आवश्यक होगा
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मोदी सरकार ने केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है . आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नाम बदलने से जुड़े केरल विधानसभा के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी . केरल चुनाव से ठीक पहले लिए गए इस फ़ैसले को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है. भारत के सुदूर दक्षिण का राज्य केरल जल्द ही केरलम नाम से जाना जाएगा . राज्य का नाम बदलने की अनुशंसा राज्य विधानसभा की तरफ़ से की गई थी . 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि मलयाली भाषा के मुताबिक़ राज्य का नाम केरलम ही होना चाहिए. इसलिए केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 3 के मुताबिक़ राज्य का नाम केरलम करने के लिए तुरंत क़दम उठाना चाहिए .

विधानसभा की इसी सिफारिश को मानते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रालय को कैबिनेट नोट तैयार करने का निर्देश दिया था जिसपर आज कैबिनेट ने मुहर लगा दी . संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार अनुच्छेद 3 में किसी राज्य का नाम बदलने का प्रावधान किया गया है .नियम के मुताबिक़ कैबिनेट की अनुमति मिलने के बाद अब राष्ट्रपति की ओर से एक बिल राज्य विधानसभा की अनुमति के लिए भेजा जाएगा. बिल के नाम Kerala ( Alteration of Name ) Bill , 2026 रखा गया है.

राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए इस बिल पर राज्य विधानसभा की अनुमति ली जाएगी . नियम के मुताबिक़ राज्य विधानसभा की अनुमति मिलने के बाद बिल को वापस केंद्र सरकार को भेजा जाएगा . उसके बाद राष्ट्रपति की अनुमति से इस बिल को संसद में पेश कर चर्चा के बाद पारित किया जाएगा . संसद से बिल पारित होने के बाद औपचारिक तौर पर केरल का नाम बदलकर केरलम हो जाएगा . 

प्रक्रिया पूरी करने की कोई तय समय सीमा नहीं है. राष्ट्रपति जब बिल को राज्य विधानसभा के पास उसकी अनुमति के लिए भेजती हैं तो एक समय सीमा दे सकती हैं लेकिन ये अनिवार्य नहीं है . ऐसे भी, अगले दो हफ़्तों में केरल में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान होने की संभावना है . इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले प्रक्रिया पूरी होने की संभावना काफ़ी कम है . 

चुनाव के बेहद क़रीब लिए गए इस फ़ैसले को स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक नज़रिए से भी देखा जा रहा है . अभी तक इस फ़ैसले पर राज्य की सत्तारूढ़ सीपीएम या मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है . उधर , इस बहाने पश्चिम बंगाल में राजनीति ज़रूर गरमा गई है . कैबिनेट के फ़ैसले पर मुख्यमंत्री और टीएमसी मुखिया ममता ने कहा कि राज्य विधानसभा ने भी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है लेकिन केंद्र सरकार उसपर आगे क़दम नहीं बढ़ा रही है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Explained: क्या है आर्टिकल 3 जिसका इस्तेमाल करके केंद्र केरल को बनाएगा ‘केरलम'

यह भी पढ़ें: केरलम, श्रीनगर में नया एयरपोर्ट टर्मिनल, रेलवे प्रोजेक्ट... सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक के 8 बड़े फैसले

Featured Video Of The Day
Israel Iran War: Strait of Hormuz खोलने के लिए War Ship नहीं भेजने से China पर भड़के Trump|Xi Jinping
Topics mentioned in this article