- फरवरी 2026 में आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या के बाद शिया समुदाय में अमेरिका-इजरायल विरोधी प्रदर्शन हुए थे
- अमरोहा के राहिब और जफर को सऊदी पुलिस ने मार्च में ईरान को पैसे भेजने के आरोप में हिरासत में लिया गया
- दोनों भाइयों के परिवार ने बताया कि उन्होंने ईरान की मदद के लिए अपनी सेविंग से दान भेजा था, जिसके बाद गिरफ्तारी
28 फरवरी 2026 को आयतुल्लाह खामेनेई के अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद से दुनिया भर में शिया समुदाय के लोगों में शौक की लहर थी. लोगों ने सड़कों पर उतर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो कई ने फोन स्टेटस पर अयातुल्लाह खामेनई की फोटो भी लगाई. कुछ लोगों ने संकट की इस घड़ी में ईरान की मदद के लिए करोड़ों रुपये तक दान दिये. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग लोगों ने अपनी सेविंग से ईरान में मदद पहुंचाई. लेकिन सऊदी में रहने वाले दो भारतीयों को ईरान की मदद करना बेहद महंगा पड़ गया. यूपी में अमरोहा के नौगावां में रहने वाले मोहम्मद राहिब और मोहम्मद जफर को इस साल मार्च में सऊदी पुलिस ने दम्माम से हिरासत में ले लिया. छोटे भाई राहिब को 27 मार्च, वहीं जफर को 30 मार्च को डिटेन किया गया. इसकी पुष्टि भारत सरकार की रियाद में एंबेसी ने भी कर दी है. इस मामले में भारत सरकार ने कहा कि दोनों भाइयों को सुरक्षा संबंधी कारणों से हिरासत में लिया गया है.
ईरान एंबेसी में पैसे भेजने की वजह से गिरफ्तारी!
अमरोहा में रहने वाले मोहम्मद राहिब और मोहम्मद जफर के माता-पिता नौगांवा में ही रहते हैं. पिता को पैरालाइज है और मां खुद घर में उनकी सेवा में लगी रहती है. घर की गरीबी दूसर करने के लिए 5 साल पहले राहिब, सऊदी के दम्माम में चला गया और वहां एक दुकान पर काम करने लगा. लगभग 9 महीने पहले राहिब छोटे भाई जफर को भी सऊदी ले गया. राहिब और जफर के परिजनों ने बताया, जफर से जब आखिरी बार मां की बात हुई तो दोनों के बीच ईरान पर हुए हमले का जिक्र हुआ था. मां ने राहिब से इस दौरान कहा था कि कुछ पैसे भेज देना, ईरान के लोगों की मदद के लिए ईरान एंबेसी भेजने हैं. इस पर राहिब ने मां से कहा था था कि वह खुद ही ईरान एंबेसी में पैसे भेज देगा. इसके बाद राहिब ने छोटे भाई जफर के फोन से ईरान एंबेसी में पैसे भेज दिए."
परिवार ने बताया कि आखिरी बार बात में जफर ने मां को बताया कि उसने 200 रियाल दान दे दिए थे. लेकिन वो बैंक से वापिस आ गए हैं. इसके बाद 27 मार्च को सऊदी सुरक्षाकर्मी उनके घर आए और छोटे भाई को डिटेन करके ले गए. वहीं, 30 मार्च को बड़े भाई को भी सुरक्षाकर्मी उठाकर ले गए. तब से लेकर अब तक उनके बारे में कोई भी जानकार या बात परिवार से नहीं हो सकी है. परिवार का कहना है कि अकाउंट में पैसे भेजने की वजह से ही उन्हें हिरासत में लिया गया है. हालांकि, अभी तक सऊदी पुलिस की तरफ से इस मामले में कोई सफाई नहीं आई है. परिवार को यह भी नहीं बताया गया है कि किस कारण से दोनों भाइयों को डिटेन किया गया है.
बुजुर्ग पिता की सरकार से गुहार- मेरे बेटों को ला दो...
वहीं, बुज़ुर्ग पिता हसन अब्बास जो लकवाग्रस्त है. उन्होंने वीडियो के माध्यम से विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील की है कि उनके दोनों बच्चे सऊदी में लापता हैं. मैं बीमार और मजबूर हूं. मेरा सारा खर्चा मेरे बच्चे उठाते थे. आपसे अपील है कि मेरे बच्चों के बारे में पता करके बताएं. वहीं, मां फरजाना खातून ने दोनों बच्चों की फोटो हाथ में लेकर सरकार से रोते हुए अपील की... मेरे घर में कमाने वाले दोनों बच्चे ही हैं. मेरे शौहर का लकवे की वजह से सिर्फ एक ही हाथ चलता है. दवाइयों के लिए पैसे भी अब खत्म हो गए हैं. बस आपसे गुजारिश है कि मेरे बच्चों को मिलवा दीजिए. आपका बहुत शुक्रिया.
फरजाना ने एनडीटीवी से बातचीत करते हुए कहा कि छोटे बेटे को ले जाने के 3 दिन बाद उसके बड़े बेटे पर फोन आया कि अपने छोटे भाई का फोन ले जाओ, वो रास्ते में था, तभी उसको पुलिस ने डिटेन कर लिया. मां का कहना है कि उनके शौहर भी सऊदी में ही काम करते थे. कुछ साल पहले ब्रेन स्ट्रोक की वजह से 5 महीने वो सऊदी में ही अस्पताल में रहे, जिसके बाद भारत आए और उन्हें लकवा मार गया.
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भारतीय दूतावास ने परिवार को क्या दिया जवाब?
भारतीय दूतावास, रियाद के कम्युनिटी वेलफेयर विंग से जुड़े सुमित कुमार ने परिवार को ईमेल के जरिए जानकारी दी. उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मोहम्मद रहीब हसन और मोहम्मद जफर हसन को सुरक्षा संबंधी कारणों से हिरासत में लिया गया है. मामले की आगे की जानकारी प्राप्त करने के लिए दूतावास ने सऊदी विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है. अभी और विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है.
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