संख्या कम, दावेदारी ज्यादा: बीएमसी में पार्टी ऑफिस को लेकर घमासान, BJP‑शिंदे सेना भी बड़े स्पेस पर अड़े

बीएमसी चुनाव के बाद मेयर का फैसला भले ही लंबित हो, लेकिन मुख्यालय में पार्टी दफ्तर के लिए राजनीतिक खींचतान चरम पर है.

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  • बीएमसी चुनाव के बाद मेयर पद का निर्णय लंबित है, लेकिन पार्टी ऑफिस आवंटन को लेकर राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है
  • बीएमसी में कार्यालय आवंटन के लिए पार्षदों की न्यूनतम संख्या छह का नियम है
  • AIMIM ने हाल ही में हुए चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था
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मुंबई:

मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद जहां मेयर का फैसला अभी लंबित है, वहीं दूसरी तरफ बीएमसी मुख्यालय में पार्टी ऑफिस पाने के लिए राजनीतिक जंग शुरू हो चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि कई दलों के पास पार्षदों की संख्या कम है, फिर भी वे दफ्तर आवंटन के लिए जोरदार दावेदारी कर रहे हैं. बीएमसी में किसी राजनीतिक दल को स्वतंत्र कार्यालय देने के लिए कम से कम 6 पार्षदों का नियम लागू होता है, लेकिन इस बार परिस्थिति ऐसी बनी है कि प्रशासन खुद इस नियम में ढील देने पर विचार कर रहा है. 

इसका बड़ा कारण है छोटे दलों को खुश रखना और निगम में समन्वय बनाए रखना. इस चुनाव में AIMIM पहली बार मजबूती से उभरी है और उसके 8 नगरसेवक चुनकर आए हैं. संख्या बल के हिसाब से AIMIM को अपना अलग कार्यालय मिलना लगभग तय माना जा रहा है. पार्टी ने भी इसे लेकर प्रशासन के सामने औपचारिक दावा पेश कर दिया है.

वहीं दूसरी ओर, सपा और एनसीपी के दोनों गुटों के पास नगरसेवकों की संख्या कम है. ऐसे में प्रशासन उन्हें संयुक्त कार्यालय देने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि नियम का ढांचा भी बना रहे और राजनीतिक नाराजगी भी न बढ़े.
MNS ने भी बीएमसी मुख्यालय में अपने कार्यालय के लिए आवेदन दिया है. पार्टी का कहना है कि उसका राजनीतिक अस्तित्व और कार्यप्रणाली मुंबई से गहराई से जुड़ी है, इसलिए कार्यालय आवंटन जरूरी है. 

इसी बीच, उद्धव ठाकरे गुट ने भी अपने पुराने दफ्तर पर दोबारा दावा ठोक दिया है. उनका कहना है कि यह कार्यालय ऐतिहासिक रूप से उनके ही अधिकार क्षेत्र में रहा है. सबसे दिलचस्प स्थिति भाजपा और शिंदे सेना की है. दोनों गुटों ने अभी तक बीएमसी में अपना आधिकारिक पार्टी गुट घोषित नहीं किया है, फिर भी सत्ता समीकरणों के आधार पर दोनों दल मुख्यालय में बड़ा और प्रमुख कार्यालय मांगने पर अड़े हुए हैं. हालांकि मेयर कौन बनेगा, यह अभी तय नहीं है, लेकिन पार्टी दफ्तरों की इस जंग ने बीएमसी मुख्यालय में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है.

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