- भाजपा ने बंगाल चुनाव परिणामों के बाद संभावित स्थिति को संभालने के लिए दोहरी रणनीति तैयार की है.
- अमित शाह राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बंगाल जा सकते हैं.
- जीत की स्थिति में भाजपा कार्यकर्ताओं को संयम बरतने और बिना बदले की राजनीति के साथ सत्ता हस्तांतरण पर जोर देगी.
पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों से पहले BJP ने दोहरी रणनीति तैयार की है. पार्टी को जहां जीत की उम्मीद है, वहीं 2021 जैसी पोस्ट-पोल हिंसा की आशंका भी सता रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए 'प्लान-A' और 'प्लान-B' दोनों एक्टिव मोड में हैं. ताकि नतीजों के बाद किसी भी स्थिति को संभाला जा सके.
अमित शाह का दौरा
अमित शाह नतीजों के आसपास बंगाल आ सकते हैं. दौरे का मकसद सिर्फ जीत का जश्न नहीं, बल्कि ग्राउंड सिचुएशन पर नजर और कंट्रोल रखना है. राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती रहेगी. राज्य में अगले दो महीने तक भारी फोर्स रहेगा.
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प्लान-A: जीत की स्थिति में ‘संयम'
पार्टी की तरफ से कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश है कि कोई उकसावे वाला जश्न नहीं मनाएगा. अगर भाजपा जीतती है तो पार्टी का फोकस है कि बिना बदले की राजनीति के स्मूद पावर ट्रांजिशन किया जाए. इसके जरिए भाजपा मैसेज देना चाहती है कि सरकार बदले या न बदले पर राज्य माहौल न बिगड़े.
प्लान-B: हार की स्थिति में ‘सुरक्षा कवच'
पार्टी को 2021 जैसी हिंसा दोहरने की आशंका भी है. भाजपा में शीर्ष नेताओं का मानना है कि अगर TMC हारी तो राज्य में कई जगहों पर हिंसा भड़केगी. इसके लि केंद्रीय बलों के जरिए कार्यकर्ताओं की सुरक्षा प्राथमिकता है. लोकल यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं कि लो-प्रोफाइल रहें और टकराव से बचें.
दिल्ली से ग्राउंड कंट्रोल
भाजपा ने नित्यानंद राय, भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल को पहले ही बंगाल में तैनात कर दिया है ताकि नतीजों से पहले और बाद दोनों वक्त हालात पर नजर रखी जा सके. BJP की रणनीति साफ है कि बंगाल में असली परीक्षा सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि नतीजों के बाद शांति बनाए रखने की है. इसलिए इस बार पार्टी 'विक्ट्री प्लान' से ज्यादा 'स्टेबिलिटी प्लान' पर जोर दे रही है. बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान) के नतीजे 4 मई को आने वाले हैं.













